दीवाली रौशनी का त्यौहार कब क्यों और कैसे  बनाया जाता है 

DIWALI THE FESTIVAL OF LIGHTS
नमस्कार दोस्तों आप सभी को मेरी तरफ से दीपावली की शुभ-कामनाये दीवाली या दीपावली अर्थात रोशनी का त्योहार शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। दिवाली, एक धार्मिक, विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश औऱ खुशी का, अंधकार हटाने का, मिठाईयों का,पूजा आदि का त्यौहार है, जो पूरे भारत के साथ साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है। यह रोशनी की कतार या प्रकाश का त्यौहार कहा जाता है। यह सम्पूर्ण विश्व में मुख्यतः हिन्दूओं और जैनियों द्वारा मनाया जाता है।उस दिन बहुत से देशों जैसे तोबागो, सिंगापुर, सुरीनम, नेपाल, मारीशस, गुयाना, त्रिनद और श्री लंका, म्यांमार, मलेशिया और फिजी में राष्ट्रीय अवकाश होता है।

भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाना इसे सिखबौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं। और सिख समाज इस को बंदी छोड़ के रूप में मानते है।  

दिवाली के त्यौहार पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है ताकि सभी अपने मित्रों और परिवार के साथ त्यौहार का आनन्द ले सकें। लोग इस त्यौहार का बहुत लम्बे समय से इंतजार करते है और इसके नजदीक आते ही लोग अपने घरों, कर्यालयों, कमरों, गैराजों को रंगवाते और साफ कराते है और अपने कार्यालयों में नयी चैक बुक, डायरी और कलैण्डर वितरित करते है। वे मानते है कि साफ सफाई और त्यौहार मनाने से वे जीवन में शान्ति और समृद्धि प्राप्त करेंगें। सफाई का वास्तविक अर्थ दिल के हर कोने से सभी बुरे विचार, स्वार्थ और दूसरों के बारे में कुदृष्टि की सफाई से है।

व्यापारी अपने वर्ष के खर्च और लाभ जानने के लिये अपने बहीखातों की जॉच करते है। शिक्षक किसी भी विषय में अपने छात्रों की प्रर्दशन और प्रगति का निरीक्षण करते है। लोग उपहार देने के माध्यम से दुश्मनी हटाकर सभी से दोस्ती करते है। कॉलेज के छात्र अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दिवाली कार्ड और एस एम एस भेजते है। आज कल इंटरनेट के माध्यम से दीवाली ई-कार्ड या दीवाली एसएमएस भेजने के सबसे लोकप्रिय चलन बन गया है। भारत में कुछ स्थानों पर दीवाली के मेले आयोजित किये जाते है जहां लोग आनंद के साथ नए कपड़े, हस्तशिल्प, कलाकृतियॉं, दीवार के पर्दे, गणेश और लक्ष्मी, रंगोली, गहने और उनके घर के अन्य जरूरी चीजों के पोस्टर खरीदने के लिये जाते है।

घर के बच्चे माता पिता के साथ संध्या आरती करके, रात को आतिशबाजी करके, दिये और मोमबत्ती जला कर, हाथ से बने दिवाली कार्ड देकर, खेल खेल कर यह त्यौहार मनाते है। घर पर माँ कमरे के बिल्कुल बीच में रंगोली बनाती है, नयी और आकर्षक मिठाईयॉ, नये व्यंजन जैसे गुँजिया, लड्डू, गुलाब जामुन, जलेबी, पेडे और अन्य तरह के व्यजंन बनाती है।

दीपवाली शब्द की उत्पति 

दिवाली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' अर्थात 'दिया' व 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' के मिश्रण से हुई है। इसके उत्सव में घरों के द्वारों, घरों व मंदिरों पर लाखों प्रकाशकों को प्रज्वलित किया जाता है। दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं उसे अन्य भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकार जाता है। 

दीवाली कब मनायी जाती है 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार दीवाली अश्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की 13 वें चंद्र दिन (जो भी अंधेरे पखवाड़े के रूप में जाना जाता है) पर मनाया जाता है। यह परम्परागत रुप से हर साल मध्य अक्टूबर या मध्य नवम्बर में दशहरा के 18 दिन बाद मनाया जाता है। यह हिन्दूओं का बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है।
दीपावली कब और केसे मानते है
दिवाली का त्यौहार हर साल बहुत सारी खुशियों के साथ आता है और पॉच दिनों से अधिक समय धनतेरस से भाई दूज पर पूरा होता है।कुछ स्थानों पर जैसे कि महाराष्ट्र में यह छह दिनों में पूरा होता है [वासु बरस या गौवास्ता द्वादशी के साथ शुरू होता है और भईया दूज के साथ समाप्त होता है]।

दीवाली क्यों मनायी जाती है 

 हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली का त्यौहार मनाने के बहुत सारे कारण है और नये वर्ष को ताजगी के साथ शुरु करने में मनुष्यों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोगों की यह मान्यता है कि जो वे इस त्यौहार पर करेगें वहीं पूरे साल करेगें। इसलिये लोग अच्छे काम करते है, धनतेरस पर खरीदारी करना, घर के प्रत्येक कोने को प्रकाशित करना, मिठाई बॉटना, दोस्ती करना, भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी जी की शान्ति और समृद्धि पाने के लिये पूजा करना, अच्छा और स्वादिष्ट भोजन करना, अपने घरों को सजाना और अन्य गतिविधियॉ जिससे वे पूरे साल ऐसा कर सकें। व्यवसायी अपने खातों को अच्छे से तैयीर करते है ताकि वे पूरे साल ऐसे ही रहें। हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली मनाने के निम्नलिखित बहुत सारे पौराणिक और ऐतिहासिक कारण है।दिवाली हर साल हिन्दूओं और अन्य धर्म के लोगो द्वारा मुख्य त्यौहार के रुप में मनायी जाती है।
दीपावली क्यों मानते है

भगवान राम के 14 साल वनवास पूर्ण होने और विजय आगमन

हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और उसके राज्य लंका को अच्छी तरह से जीतकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य, अयोध्या, बहुत लम्बे समय(14 वर्ष) के बाद वापस आये थे। अयोध्या के लोग अपने सबसे प्रिय और दयालु राजा राम, उनकी पत्नी और भाई लक्ष्मण के आने से बहुत खुश थे। इसलिये उन्होनें भगवान राम का लौटने का दिन अपने घर और पूरे राज्य को सजाकर, मिट्टी से बने दिये और पटाखे जलाकर मनाया।

भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को बचाया - हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनों लोक (पृथ्वी, आकाश और पाताल) का मालिक बनना चाहता था, उसे भगवान विष्णु से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरे विश्व में केवल गरीबी थी क्योंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बाली द्वारा रोका हुआ था। भगवान के बनाये ब्रह्मांण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनों लोकों को बचाया था (अपने वामन अवतार, 5 वें अवतार में) और देवी लक्ष्मी को उसकी जेल से छुडाया था। तब से, यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचाने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया।

देवी लक्ष्मी का जन्मदिन - देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की स्वामिनी है। यह माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुन्द्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के समुन्द्र (क्षीर सागर) से कार्तिक महीने की अमावश्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिवाली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया।

राज्य में पांडवों की वापसी -  महान हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, निष्कासन के लम्बे समय(12 वर्ष) के बाद कार्तिक महीने की अमावश्या को पांडव अपने ऱाज्य लौटे थे। कोरवों से जुऐं में हारने के बाद उन्हें 12 वर्ष के लिये निष्कासित कर दिया गया था। पांडवों के राज्य के लोग पांडवों के राज्य में आने के लिए बहुत खुश थे और मिट्टी के दीपक जलाकर और पटाखे जलाकर पांडवों के लौटने दिन मनाना शुरू कर दिया।

भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मार डाला - मुख्य दिवाली से एक दिन पहले का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। बहुत समय पहले, नरकासुर नाम का राक्षस राजा(प्रदोषपुरम में राज्य करता था)था, जो लोगों पर अत्याचार करता था और उसने अपनी जेल में 16000 औरतों को बंधी बना रखा था। भगवान कृष्ण (भगवान विष्णु के 8 वें अवतार) उसकी हत्या करके नरकासुर की हिरासत से उन सभी महिलाओं की जान बचाई थी। उस दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।


सिखों के लिए विशेष दिन- अमर दास (तीसरे सिख गुरु) ने दिवाली को लाल-पत्र दिन के पारंम्परिक रुप में बदल दिया जिस पर सभी सिख अपने गुरुजनों का आशार्वाद पाने के लिये एक साथ मिलते है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी वर्ष 1577 में दीवाली के मौके पर की गयी थी। हरगोबिंद जी (6 सिख गुरु) को वर्ष 1619 में मुगल सम्राट जहांगीर की हिरासत से ग्वालियर किले से रिहा किया गया था।

विक्रमादित्य का राज्याभिषेक - राजा विक्रमादित्य एक महान हिन्दू राजा का विशेष दिन पर राज्यभिषेक हुआ तब लोगों ने दिवाली को ऐतिहासिक रुप से मनाना शुरु कर दिया।

गुजरातियों के लिए नया साल - चंद्र कैलेंडर के अनुसार, गुजराती भी कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन दीवाली के एक दिन बाद अपने नए साल का जश्न मनाते है। 

मारवाड़ी नया साल - हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मारवाड़ी अश्विन की कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर महान हिंदू त्यौहार दीवाली पर अपने नए साल का जश्न मनाते है।

जैनियों के लिए विशेष दिन -  तीर्थंकर महावीर, जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की, उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दीवाली के रूप में मनाया जाता है।

आर्य समाज के लिए विशेष दिन - महर्षि दयानंद महान हिन्दू सुधारक के साथ साथ आर्य समाज के संस्थापक थे और उन्होंने कार्तिक के महीने में नया चाँद(अमावश्या) के दिन निर्वाण प्राप्त किया। उस दिन से इस खास दिन के उपलक्ष्य में दीवाली के रूप में मनाया जा रहा है।

दीवाली का महत्व हिन्दू धर्म के अनुसार 

दीपावली का महत्व
हिंदुओं के लिए दीवाली, सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का त्यौहार है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि लोग पाप पर सत्य की विजय का आनंद लेने के लिए दिवाली मनाते हैं। दिवाली रावण को हराने के बाद 14 साल के वनवास बाद भगवान राम के अपने राज्य अयोध्या घर वापसी का स्वागत करने के लिए लोगों द्वारा मनाया जाता है। लोगो ने कतारों में बहुत से घी के दीयों को जलाकर भगवान राम का स्वागत किया।

दीवाली के त्यौहार पर लोगों द्वारा पटाखे और रोशनी का प्रयोग करने से सम्बन्धित एक और कहानी और महत्व है। लोग पूरे वर्ष के लिए अच्छा स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, शांति, समृद्धि प्राप्त करने के मिथक में पटाखों का प्रयोग करते है। पटाखों के उपयोग की एक और रस्म है, पृथ्वी पर पटाखों की उच्च श्रेणी की ध्वनि लोगों की असली खुशी का संकेत है। पटाखों से निकला धूआ बरसात के मौसम के बाद उत्पन्न हुये बहुत से कीडों को मारता है। और कई बीमारी को भी खत्म करता है। दिवाली पर जुआ खेलने के रिवाज का भी महत्व है। लोगो को विश्वास है कि इस दिन देवी पार्वती और भगवान शिव पासों से खेले थे। लोग भी इसी मिथक के साथ पूरे वर्ष समृद्धि पाने के लिये दिवाली की रात इस खेल को खेलते है।

दीपावली का इतिहास 

ऐतिहासिक रुप से, दिवाली भारत में बहुत प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब, लोग इसे मुख्य फसल के त्यौहार के रुप में मनाते थे। हालाकिं कुछ इस विश्वास के साथ इस त्यौहार को मनाते है कि इस दिन देवी लक्ष्मी की शादी भगवान विष्णु के साथ हुई थी।हिन्दू इस शुभ त्यौहार को बुद्धिमत्ता के देवता गणेश और माता लक्ष्मी (धन और समृद्धि की माता) का पूजा करके मनाते है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि दिवाली की उत्पत्ति इस प्रकार हुई; इस दिन देवी लक्ष्मी देवताओं और दानवों द्वारा बहुत लम्बे समय तक सागर मंथन के बाद दूध (क्षीर सागर) के समुन्द्र से बाहर आई। वह ब्रह्माण्ड में मानवता के उद्धार के लिये धन और समृद्धि प्रदान करने के लिये अवतरित हुई। इनका स्वागत और सम्मान करने के लिये लोगों ने देवी लक्ष्मी की पूजा की। 

दीपावली से पहले के और बाद के त्यौहार 

  1. दिवाली का पहला दिन धनतेरस के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है घर में धन और समृद्धि का आना। लोग बर्तन, सोने और चॉदी के सिक्के, और अन्य वस्तुऍ खरीद कर इस विश्वास के साथ अपने घर लाते है कि घर में धन की वृद्धि होगी।
  2. दिवाली का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के नाम के जाना जाता है, जो इस विश्वास के साथ मनाया जाता है कि भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर को हराया गया था।
  3. दिवाली का तीसरा दिन अमावश्या के नाम के जाना जाता है जो हिन्दू देवी लक्ष्मी (धन की देवी) की पूजा के इस विश्वास के साथ मनाया जाता है, जो सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है।
  4. दिवाली का चौथा दिन बली प्रदा के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु की कथा से सम्बऩ्धित है जिन्होंने अपने वामन अवतार में राक्षस राजा बलि को हराया था। बलि बहुत महान राजा था किन्तु पृथ्वी पर शासन करते हुये वह लालची हो गया क्योंकि उसे भगवान विष्णु द्वारा असीमित शक्तियों की प्राप्ति का वरदान मिला था। गोर्वधन पूजा इस विश्वास के साथ भी मनाया जाता है कि भगवान कृष्ण ने असहनीय काम करके इन्द्र के गर्व को हराया था।
  5. दिवाली का पॉचवा दिन  भाई दूज के नाम से भी जाना जाता है जो मृत्यु के देवता “यम” और उनकी बहन यामी के इस विश्वास के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन को बहन और भाई के एक दूसरे के प्रति प्रेम और स्नेह के उपलक्ष्य में मनाते है।
दीपावली वाले दिन लक्ष्मी पूजा - यह मुख्य दिन दीवाली जो लक्ष्मी पूजा (धन की देवी) और गणेश पूजा (सभी बाधाओं को हटा जो ज्ञान के देवता) के साथ पूरी होती है। महान पूजा के बाद वे अपने घर की समृद्धि और भलाई का स्वागत करने के लिए सड़कों और घरों पर मिट्टी के दीये जलाते है।


दिवाली इस वर्ष  2017

गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017
धनतेरस -  मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
 छोटी दीवाली -  बुद्धवार, 18 अक्टूबर 2017
लक्ष्मी पूजा [मुख्य दिवाली] -  गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017
 गोवर्धन पूजा -  शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017
 भाईदूज -  शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

दीवाली  लक्ष्मी पूजा और गणेश  पूजा विधि 

दिवाली हिन्दूओं का बहुत महत्वपूर्ण और परंपरागत त्यौहार है, त्यौहार में कई हिंदू देवी-देवताओं की पूजा शामिल है, लेकिन मुख्य रूप से भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी जी की मंत्र, आरती, प्रार्थना, प्रसाद  के माध्यम से हिन्दू धर्म में पूजा की जाती है। हिन्दूओं में दीवाली पूजा करने के 16 चरण है जैसे: भगवान का स्वागत करना, बैठने के लिये साफ जगह देना, पैर धोना, देवी देवताओं को अलंकरित करना, आवश्यक तत्व अर्पित करना, भगवान को वस्त्र पहनाना आदि क्रियाऍ देवी देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिये की जाती है। हिंदू देवी-देवताओं के लिए एक विशेष पूजा, घरों की सफाई, भजन गाना, मंत्रों का जाप, घंटी बजाना, प्रसाद की किस्म अर्पित करना, शंख बजाना, आरती पढ़ना, प्रसाद बाँटना और परिवार में बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर की जाती है। पूजा करने के बाद लोग घर की बनी हुई और तैयार की गयी मिठाईयाँ नवैध के रुप में देवी को अर्पित करते है और उसी मिठाई को परिवार के सदस्यों को प्रसाद के रुप में वितरित करते हैं। देवी देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिये लोग इस प्रसाद को अपने माथे से लगाकर खाते हैं। पूजा के बाद लोग एक दूसरे को उपहार और मिठाईयाँ देते है।

दीपावली में पूजा किस तरह की जाती है 
दिवाली पूजा शाम को सूरज छिपने के बाद परिवार के सभी सदस्यों द्वारा पूजा स्थान पर इकट्ठा होकर शुरु की जाती है। यह माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से आशीर्वाद, शान्ति, समृद्धि और धन की बौछार होगी। देवी और देवता की मूर्ति के आगे पाँच घी के दीये, सभी अर्पित करने वाले नवैध रखकर लोग देवी लक्ष्मी और गणेश जी के सम्मान में गीत गाकर पूजा शुरु करते हैं। पूजा आरती पढ़कर और प्रसाद बाँटने के साथ समाप्त होती है। लोग अपने जीवन के साथ-साथ संसार से भी अन्धकार को दूर करने के लिये अपने घर के चारों ओर दीये जलाते है।

दीपावली लछमी गणेश पूजा विधि
हिन्दू धर्म प्रथम पूजा गणेश जी की 

हिन्दूओं में किसी भी देवी या देवता की पूजा के पहले भगवान गणेश  जी की पूजा करने की संस्कृति और परंपरा है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार,यह माना जाता है कि गणेश जी की पूजा के बिना की गयी पूजा अधूरी रहती है। भगवान गणेश जी को विघ्नविनाशक कहा जाता है क्योंकि वे मनुष्य के जीवन से सभी कठिनाईयों को नष्ट करते है। भगवान गणेश प्रत्येक दिवाली पर लोगों द्वारा आशीर्वाद, बुद्धि, शान्ति और समृद्धि प्राप्त करने के लिये पूजे जाते है। पूरे भारत में भगवान गणेश किसी भी नई परियोजना, व्यापार, उद्यम, व्यवसाय या यहां तक कि जन्मदिन पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं द्वारा पूजे जाते है।भगवान गणेश जी की पूजा बहुत बडी व्यवसायिक हानि से ग्रसित, नया व्यवसाय खोलने वालो और नयी शादी होने वाले उन सभी व्यक्तियों के जीवन से सभी बाधाओं को हटाने के लिये बहुत लाभदायक होती है। 

लक्ष्मी जी की पूजा का समय 

दिवाली उत्सव का तीसरा दिन बहुत महत्वपूर्ण और मुख्य दिवाली का दिन होता है, जब लोगों द्वारा लक्ष्मी पूजा की जाती है। पूरे वर्ष आशीर्वाद और धन प्राप्त करने के लिए वे इस पूजा को करने के लिए बहुत उत्सुक और समर्पित हैं। यह सबसे शुभ और चमत्कारिक दिन अमावस्या की अंधेरी रात को पडता है।  लक्ष्मी पूजा के बाद, दीपक जलाने की रस्म सभी घरों, सड़कों, घर की छत और अन्य स्थानों पर भी शुरू कर दिया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार पूजा से पहले बिना किसी भी स्थान को छोडे पूरे घरों को साफ करना बहुत आवश्यक है। यह माना जाता है कि धन की देवी पहले घर का मुआइना करेंगी तब आशीर्वाद की बारिश करेंगी। पूजा आम तौर पर हल्दी, कुमकुम और प्रसाद अर्पित करके की जाती है।
एक बार फिर आप सब मित्रो को मेरी और मेरे परिवार की तरफ से दीपावली की शुभ कामनाये माँ लक्ष्मी जी और  भगवान गणेश  जी आप पर और आप के परिवार पर अपनी कृपा बनाये रखे। उम्मीद करता हो आप लोगो को आज का आर्टिकल बहुत पसंद आया होगा। अगर आप को मेरी ये पोस्ट पसंद आये तो आप अपने मित्र और अपनी फेमली के साथ इस पोस्ट को शेयर जरुर करे।  ताकि सब को दीपावली के पवित्र  त्यौहार  के बारे में पुरी जानकारी मिल सके।  आपको दीवाली रौशनी त्यौहार बहुत बहुत शुभ कामनाये। 
मिलते है आप सब से अपनी अगली पोस्ट में 
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Hindi Cell Guru

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2 comments so far,Add yours

  1. बहुत बढ़िया जानकारी दी आप ने धन्यवाद

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