Online Shopping Good Or Bad Ki Puri Jaankari Hindi Me

Online Shopping Good Or Bad 

Welcome To My Latest Online Shopping Good Or Bad Ki Puri Jaankari Article Hindi Me नमस्कार दोस्तों आज के इस Article में आप लोगो को तेजी से बड़ते ऑनलाइन शोपिंग के बारे में बताऊंगा और ऑनलाइन शोपिंग करना अच्छा है या बुरा. किस तरह से ऑनलाइन शोपिंग करते है . कितना सेव है  online शोपिंग करना . इंडिया में किया हम लोगो को ये ऑनलाइन शोपिंग कम्पनी त्यौहारों के दौरान धोखा तो नहीं देती है.सस्ता प्रोडक्ट दिखा के किया सच में ऑनलाइन शॉपिंग करने के फायदे होते है. ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड से कैसे बचे.ऑनलाइन शॉपिंग के लिए किन टाइप की साइटों से बचना चाहिए और कोन कोन सी वेबसाइट है जिन पर हम विस्वास कर सकते है.ऑनलाइन शोपिंग के नुकसान किया किया है आज इन सब चीजों के बारे में पुरी जानकारी देने की कोशिस करूँगा.तो चलिए शुरू करते है आज की पोस्ट जिस का टयटल है Online Shopping Good Or Bad Ki Puri Jaankari Article Hindi Me 

भारत की ऑनलाइन शोपिंग इंडस्ट्री आये दिन नए आयाम छू रही है। हालाँकि पिछले कुछ सालों में कई सारी साइटें असफल भी रहीं तो कुछ को अन्य बड़ी साइटों ने खरीद लिया। त्यौहारों का सीजन इन साइटों के लिए विशेष होता है। लगभग सभी साइटों पर कुछ न कुछ विशेष ऑफर ग्राहकों को लुभा रहा होता है। कहीं पर कपड़ों और मेक-अप की सेल है तो कहीं पर गेजेट्स पर सेल है। पर क्या ये डिस्काउंट असली हैं? ऑनलाइन शोपिंग साइटों पर यूजर्स को ठगने का आरोप भी लगता रहता है। क्या यह सच है?

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का बढता चलन

Online Shopping Good Or Bad 

ऑन लाइन शॉपिंग का ट्रेंड भारत में तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल की ओर से कराए गए सर्वे में पाया गया कि 2014 के मुकाबले 2015 में लोगों ने जमकर ऑनलाइन शॉपिंग की और इस साल भी ऑनलाइन शॉपिंग का बढता क्रेज बरकरार रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय कंपनियों अमेजन और ईबे के बाद फ्लिपकार्ट जैसी भारतीय कंपनियां इंटरनेट में छाई हुई हैं. कुछ लोगों को ये बेहद पसंद आ रही हैं, तो कुछ का मानना है कि इंटरनेट से सस्ता और बेहतर सामान दुकानों में मिल सकता है

भारत दुनिया के तीन सबसे तेज़ी से बढ़ रहे ऑनलाइन बाज़ारों में से एक है.  20 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ भारत तीसरा सबसे बड़ा इंटरनेट उपयोगकर्ता देश है। इसके बाद भी यह दुनिया के 10 सबसे बड़े ई-कॉमर्स बाजार में शुमार नहीं है। इसका कारण है छोटे शहरों और गांवों में इंटरनेट की रफ्तार का धीमा होना, खराब ग्राहक सेवा और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या कम होना।

भारत की ई-कॉमर्स बिक्री 2014 में जहां 5.3 अरब डॉलर (31,800 करोड़ रुपये) थी, वहीं चीन में यह 80 गुना अधिक 426.26 अरब डॉलर (25,57,760 करोड़ रुपये) और अमेरिका में 58 गुना अधिक 305.6 अरब डॉलर (18,33,900 करोड़ रुपये) थी।
जपान,चीन और अमेरिका में ई-कॉमर्स 2002-03 में लोकप्रिय हो चुका था। उन्हें यहां तक पहुंचने में 12-13 साल लगे। भारत में ई-कॉमर्स की शुरुआत 2012-13 में हुई। इसलिए भारत को भी वहां पहुंचने में उतना समय तो लगेगा ही. 2013 में शॉपिंग की समीक्षा और परिदृश्य के मुताबिक, देश का ईकॉमर्स बाजार 2009 में 2.5 अरब डॉलर था जो 2016 में बढ़कर 16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. ऑनलाइन खरीददारी का चलन सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि बिहार, पंजाब, झारखंड, उत्तरप्रदेश उत्तराखंड जैसे राज्यों के छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले उपभोक्ता भी अब ई कॉमर्स के साथ जुड़ रहे है. देश के ग्रामीण क्षेत्र भी पीछे नहीं है. ऑनलाइन कारोबार से जुड़े कई लोग कहते हैं कि खरीददारी के प्रति भरोसा पैदा होने के बाद इसका और तेज़ी से विस्तार होगा. एसोचैम रिपोर्ट में 2020 तक ऑनलाइन खरीददारी के बढ़कर 60 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान लगाया गया है. यह आंकड़ा कुल खुदरा बाजार का 6.7 फीसदी है.

भारत में युवाओ की पहली पसंद 

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भारत में ऑनलाइन खरीददारी का चलन बढ़ने में युवाओं का विशेष योगदान रहा है. इंटरनेट उपयोग करने वाले युवाओं की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है और ऐसे ही युवाओं के लिए खरीददारी का मतलब सिर्फ एक क्लिक होता है. एसोचैम की रिपोर्ट बताती है कि कुल ऑनलाइन खरीददारी में से 90 फीसदी खरीददारी 35 वर्ष से कम उम्र के लोग करते हैं. 35 फीसदी ऑनलाइन खरीददारी 18 से 25 वर्ष के युवा और 55 फीसदी 26 से 35 वर्ष के लोग करते हैं जबकि 36 से 45 वर्ष के आयुवर्ग में ऑनलाइन खरीददारी करने वालों का हिस्सा आठ फीसदी रहा है. 

मोबाइल फोन, आई पैड, डिजिटल कैमरा, ज्वेलरी और फैशन से जुडी सामग्री की ऑनलाइन खरीददारी में भारतीयों ने काफी रूचि दिखाई है. मुम्बई जैसे शहरों में शॉपिंग करना किसी सिरदर्द से कम नहीं है.यहाँ लोग किचन से सम्बंधित चीजों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करते है और पसंद आने पर कपडे भी ऑनलाइन ही खरीद लेते हैं.

ऑनलाइन सेफ शॉपिंग के टिप्स

ऑनइलाइन शॉपिंग में आपको होम डिलीवरी, आसान रिफंड और कम कीमत जैसी कई सुविधाएं घर बैठे मिलती हैं लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हैं, जिन्हें लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। क्रेडिट कार्ड या डेबिड कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट करने के साथ ही फ्रॉड की आशंका बन जाती है।कुछ टिप्स है जो आप को ध्यन रखने चाहिए .

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सिक्यॉर वेबसाइट से शॉपिंग - आजकल ऑनलाइल पोर्टल्स की भरमार है। ऐसे में आपको सिक्यॉर साइट से ही शॉपिंग करनी चाहिए। बहुत ज्यादा डिस्काउंट देने वाली साइट्स से बचना ठीक होगा।  हालांकि कस्टमर्स को ऑनलाइन शॉपिंग करने के दौरान सिक्योर ट्रांजैक्शंस की पड़ताल करनी चाहिए। किसी लिंक पर क्लिक करने की बजाय आपको संबंधित साइट का यूआरएल टाइप करना चाहिए। ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस के दौरान यूआरएल एड्रेस में 'https' पर ध्यान दें। यह सिक्योर साइट की निशानी है। केवल 'http' यूआरएल से सतर्क रहने की जरूरत है। दूसरा फ्रॉड के रिस्क को कम करने के लिए आपको वर्चुअल कीबोर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए।

पब्लिक कंप्यूटर या नेटवर्क्स का नहीं करें इस्तेमाल - ऐसी किसी मशीन या नेटवर्क्स कनेक्शन में मौजूद मैलवेयर आपके डेटाबेस में सेंध लगा सकता है। अगर आप किसी पब्लिक कंप्यूटर का इस्तेमाल कर कोई ट्रांजैक्शन करते हैं तो आपको जल्द  से जल्द अपना पासवर्ड बदल देना चाहिए।

मोबाइल बैंकिंग के लिए रजिस्टर्ड करना नहीं भूलें - अगर आपके साथ कोई फ्रॉड होता है तो वैसी स्थिति में आपको इस बात की कितनी जल्दी जानकारी मिलती है, यह बेहद अहम है। मोबाइल अलर्ट से इस मामले में आपको काफी मदद मिलती है क्योंकि इससे कस्टमर्स को तुरंत ही फ्रॉड की जानकारी मिल जाती है। अगर आपने मोबाइल बैंकिंग से अपने को जोड़ रखा है तो बैंक आपको हर ट्रांजैक्शन के बारे में लगातार जानकारी देते रहते हैं। अगर कोई गलत तरीके से आपके अकाउंट के साथ छेड़छाड़ करता है तो आप तत्काल बैंक से कहकर अपने अकाउंट को लॉक करा सकते हैं। समय पर बैंक को जानकारी दिए जाने के मामले में बैंक आपके लॉस की भरपाई भी कर सकता है।

स्टेटमेंट चेक करें - मोबाइल बैंकिंग के लिए रजिस्टर्ड हों या नहीं, लेकिन क्रेडिट कार्ड और अकाउंट डिटेल्स के स्टेटमेंट को नजरअंदाज न करें। अगर आपको कोई गलत या संदेहास्पद एंट्री दिखती है तो उसे तत्काल बैंक को सूचित करे।

ऑनलाइन शॉपिंग के फायदे

पिछले कुछ समय में ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज खासा बढ़ा है। खबरों के मुताबिक, दिल्ली में ये प्रचलन अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा बढ़ा है। ऑनलाइन शॉपिंग यानी ई-शॉपिंग के माध्यम से आप घर बैठे ही अपनी मनपंसद चीजें खरीद सकते हैं, चीजों में विविधता और नए ट्रेंड्स की जानकारी पा सकते हैं। 

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कुछ ऐसी वेबसाइट्स भी हैं जहां आप सदस्य बनकर उनके द्वारा दिए जा रहे ऑफर्स के लाभ भी उठा सकते हैं और भारी डिस्काउंट भी पा सकते हैं यानी डबल फायदा।
येबी डॉट कॉम और ट्रेड्स डॉट इन ऐसी वेबसाइट्स हैं जहां आपको कपड़ों पर अच्छा खासा डिस्काउंट मिल जाएगा। इसके अलावा शॉपिंग के लिए कुछ और वेबसाइट्स जैसे-  होमशॉप 18, लेट्स बाय डॉट कॉम, इंडिया प्लाजा डॉट कॉम, बिग बाजार की साइट फ्यूचर बाजार डॉट कॉम, ईबे इंडिया डॉट कॉम, इनफीबीम डॉट कॉम और फिल्मी सीडी की वेबसाइट्स बिग फिलिक्स डॉट कॉम और 70एमएम डॉट कॉम ऐसे ही पोर्टल हैं।

  1. आप अपनी मनपसंद चीज खरीद सकते हैं व नई-नई स्कीम भी पा सकते  हैं। नए-नए ट्रेंड्स से अपडेट रह सकते  हैं। 
  2. -वैराइटी की चीजों में से खास चीज का चुनाव कर सकते हैं। आपके पास ऑप्शंस की भरमार होती है। एक ही जगह पर हर चीज के कई ब्रांड्स और कलर्स उपलब्ध होते हैं। 
  3. -फेस्टिव सीजन में न सिर्फ आप भीड़ से बचेंगे बल्कि डिस्काउंट्स के साथ सस्ती और अच्छी चीज भी खरीद सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान कई बार आपको डिस्काउंट कूपन भी मिलते हैं, जिनका आप खूब लाभ उठा सकते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग के नुकसान

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बड़े जोरो शोरो से चल रहा है। सर की टोपी से लेकर पैरो की जुराबों तक, छोटे से फ़ोन से लेकर बड़े से मकान तक सब कुछ ऑनलाइन बिक रहा है। हमारी युवा पीढ़ी तो सबकुछ ऑनलाइन ही कर रही है। वैसे तो मैं भी इसी पीढ़ी का हिस्सा हूँ परन्तु मेरी पढ़ाई लिखाई इस ऑनलाइन क्रांति से थोड़ा पहले ही खत्म हो गयी थी, इसलिए मैं अपनी स्कूल/कॉलेज के जीवन में इस क्रांति से अछूता रह गया।अभी तो जितना हो सके मैं भी  शॉपिंग ऑनलाइन ही करता हूँ फिर चाहे कच्छा खरीदना हो या जूते या फ़ोन। या फिर कुछ भी .

मैं अपने दिल की बात बताऊ तो ऑनलाइन शॉपिंग में वो मजा नहीं है जो मजा किसी सामान को बाज़ार से खरीद के लाने में है।

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किसी उत्सव की शॉपिंग हो या शॉपिंग का उत्सव, भारत की एक प्रजाति जिसे लोग मिडल क्लास कहते है सबसे आगे रहती है। हाई क्लास वाले तो भारत में शॉपिंग करते ही कहाँ है। और जब हम शॉपिंग को उत्सव की तरह मनाते है तो बाकायदा इसके लिए दिन महीना वार चौघड़िया निश्चित करके घर से निकलते है। अब अगर कोई कहे की इस उत्सव को घर बैठे मनाओ वो भी कंप्यूटर/मोबाइल के सामने बैठे बैठे तो इसमें क्या मजा है भाई.

आईये मुद्दे की बात करते है और आपको समझाते है की बाज़ार में जाकर शॉपिंग करने के कितने फायदे है।

फैमिली आउटिंग - हमारे यहाँ कईं लोगो के लिए  शॉपिंग एक फैमिली आउटिंग की तरह होती है। यहाँ शॉपिंग से मेरा मतलब मासिक राशन की शॉपिंग से भी हो सकता है जो की बिग-बाजार, रिलायंस मार्ट या डी-मार्ट से जाके की जाती है। अपने २ साल के बच्चे को शॉपिंग कार्ट में बिठा दो और कार्ट का हैंडल अपने बड़े बच्चे को पकड़ा दो। पुरे फ्लोर पे २-३ घंटे घूम के गृहस्थी का सारा सामान लेने के बाद बच्चो को कॅश काउंटर पर पड़ी चॉकलेट दिलवा दो। शॉपिंग की शॉपिंग , आउटिंग की आउटिंग।

We time for couples - आज कल के कपल्स के लिए "वी टाइम" याने के दोनों को अकेले में साथ बिताने (बतियाने)का समय निकालने बहुत ही मुश्किल है। पूरा दिन तो काम काज में निकल जाता है, शाम को खा पी के टीवी देख के सो जाने में और अगले दिन से फिर वही। वीकेंड में फ्री टाइम मिलता है तो दोनों अपना अपना कोई पर्सनल काम निपटा लेते है और बाकी बचा टाइम मोबाइल या  लैपटॉप की भेंट चढ़ जाता है। ऐसे में अगर शॉपिंग भी लैपटॉप/मोबाइल से ही कर लोगे तो आपस में जान पहचान कब करोगे . इसके लिए जाईये कम से कम राशन तो बाहर से खरीद के लाईये, आपस में बातें करने का मौका मिलेगा, किसे क्या पसंद है जानने का मौका मिलेगा और इसी बहाने सो कॉल्ड टीम वर्क भी हो जायेगा।

आम रिटेलर पर ऑनलाइन शॉपिंग साइट का असर

Retail loss
छोटे कस्बों में बड़ा बाज़ार - महानगरों के विपरीत भारत के छोटे कस्बों में मॉल या बड़े पैमाने वाले खुदरा स्टोर नहीं हैं.कस्बों में आमतौर पर चीज़ें महंगी मिलती हैं, ख़ासतौर पर तकनीकी उत्पाद, जो महानगरों के व्यापारियों से ख़रीदी जाती हैं और दाम बढ़ा दिए जाते हैं. मोबाइल पर इंटरनेट आसानी से उपलब्ध होने के चलते अब कस्बों में भी ख़रीदार इंटरनेट पर दाम देख रहे हैं और अक्सर ऑनलाइन ख़रीदारी भी कर रहे हैं.
ई-रिटेलर्स उत्पादों पर भारी असर - जाने-माने ब्रांडों, मॉडल और विशिष्टता वाले उत्पादों को ऑनलाइन ख़रीदना आसान होता है. महानगरों से बाहर के कुछ कंप्यूटर उत्पादों के व्यापारियों ने तो बिक्री में 25% तक गिरावट की बात कही है, जिसकी वजह वह ऑनलाइन बिक्री को बताते हैं. मोटोरोला और शियोमी विवो one plus जैसे कुछ फ़ोन ब्रांड तो फ़्लिपकार्ट जैसे ई-रिटेलर्स के साथ 'एक्सक्लूसिव' डील्स कर रहे हैं.
कैश ऑन डिलिवरी-धमाकेदार सेल - बहुत से भारतीय ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं करना चाहते. इसलिए फ़्लिपकार्ट जैसे ई-रिटेलर्स ने 'कैश ऑन डिलिवरी'- सामान मिलने पर ही भुगतान करें- शुरू किया. उपभोक्ता इससे बहुत ख़ुश हैं क्योंकि इससे उन्हें सामान मिलने में देरी की वजह से पैसा वापस लेने के झंझटों से नहीं गुज़रना पड़ता. ई-टेलिंग में जिस तरह की छूट दी जा रही हैं, जैसे फ़्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे और अमेज़न का दिवाली धमाका सप्ताह, उसने देश भर में बाज़ारों, कीमतों को हिलाकर रख दिया.भारी छूटों ने एक पैमाना तय कर दिया और फिर ग्राहक खुदरा व्यापारियों से भी उसी दाम के लिए सौदेबाज़ी करते हैं. haridwar में एक शोरूम के मैनेजर ने बताया खरीदार धमाकेदार सेल की न्यूनतम कीमत देखते हैं और फिर उसी दाम पर हमसे सामान मांगते हैं .

मुफ़्त समान बदलना - मुफ़्त में सामान पहुंचना (फ़्री डिलीवरी) और बदले जाने रिप्लेसमेंट की स्थिति में मुफ़्त में उठाया जाना ऐसे ग्राहकों के लिए बहुत आकर्षक होता है जो मॉल तक नहीं जाना चाहते.

ऑनलाइन शॉपिंग पर जीएसटी के प्रभाव

त्योहारों का मौसम आ गया है और बाकी लोगों की तरह आपका मन भी कुछ खरीदारी करने का हो रहा होगा। इस साल जुलाई से गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से लागू होने के कारण इस बार त्योहारों के मौसम में आपकी खरीदारी का अहसास अलग हो सकता है। आपको खर्च और बचत दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। जीएसटी लागू होने के बाद से चार स्तर में 5%, 12%, 18% और 28% टैक्स लग रहे हैं। इसके अलावा, कुछ टैक्स फ्री और अडिशनल सेस वाली श्रेणियां भी हैं। हम इस बार त्योहारों के मौसम में आपकी खरीदारी पर जीएसटी के कारण पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात करने जा रहा हु आप सब के साथ .


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 ऑनलाइन शॉपिंग - यदि आपको ऑनलाइन चीजें खरीदना पसंद है तो आपको कुछ महत्वपूर्ण बातें याद रखनी चाहिए। यदि आप कपड़े खरीद रहे हैं तो उन कपड़ों पर ध्यान देने की कोशिश करें जिनकी कीमत 1,000 रुपये से कम है यानी जिस पर 5% टैक्स लगता है।1,000 रुपये से ज्यादा कीमतवाले कपड़ों पर 12% टैक्स लगेगा जिससे आपको 7% ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। इसी तरह, यदि आप जूते खरीदना चाहते हैं तो 500 रुपये से कम कीमत वाले जूते पर आपको कम टैक्स देना पड़ेगा। यह देखना बहुत जरूरी है कि रिटेलर जीएसटी लगाकर सामान बेच रहा है या कीमत चुकाने के समय टैक्स जोड़ता है। इसलिए जीएसटी युक्त कीमत वाले सामान दिखानेवाले पोर्टलों पर विचार करना बेहतर है। ऑनलाइन रिटेलर द्वारा दिए जानेवाले डिस्काउंट के आधार पर सबसे अच्छे सेलर का चयन किया जा सकता है।

purchase कार प्रॉपर्टी या गोल्ड खरीद - धनतेरस और दिवाली के मौके पर लोग कार प्रॉपर्टी और गोल्ड जैसी महंगी चीजें खरीदना पसंद करते हैं। शुरू-शुरू में कार पर 28% जीएसटी लगने के साथ-साथ उसके आकार, कीमत और क्षमता के आधार पर 1%, 3% और 15% उपकर लगता था। जीएसटी के कारण कार की कीमतें कम हो गई थीं, खास तौर पर लग्जरी और एसयूवी कारों की। हाल ही में सरकार ने 25% सेस लगाने का प्रस्ताव रखा है। इससे हाई ऐंड कारों की कीमत बढ़ जाएगी। इसलिए, यदि आप ऐसी कार खरीदना चाहते हैं तो कार की कीमत पर 10% की बचत करने के लिए उसे अभी बुक कर लें।

यदि आप इस बार त्योहारों के मौसम में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो जीएसटी बचाने के लिए पहले से तैयार घर खरीदने पर विचार करें क्योंकि उन्हें जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। होम लोन पर पहले से ही लगभग 8% का ब्याज लग रहा है और बैंक प्रोसेसिंग फीस से राहत भी दे रहे हैं, इसलिए इस बार त्योहारों के मौसम में आप एक घर खरीदने पर विचार कर सकते हैं।

यदि आप गहने खरीदना चाहते हैं तो आपको उस पर 3% टैक्स और उसके मेकिंग चार्ज पर 3% जीएसटी देना पड़ेगा। त्योहारों के मौसम में खरीदी जानेवाली लोकप्रिय चीजें यानी सोने के सिक्के पर 3% जीएसटी लगेगा। सोने की बिस्किट पर 18% की दर से टैक्स लगेगा। लेकिन, यदि आप गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं तो ईटीएफ और सॉवरन गोल्ड बॉन्ड्स (एसजीबी) सबसे बढ़िया विकल्प होगा क्योंकि इनकी खरीद पर आपको जीएसटी देना नहीं पड़ेगा।

कुल मिलाकर, इस बार त्योहारों के मौसम में आपकी खरीदारी पर जीएसटी के कारण पड़नेवाला प्रभाव लगभग बेअसर होगा क्योंकि एक तरह की खरीदारी पर आपको कुछ पैसे का लाभ हो सकता है तो दूसरी तरह की खरीदारी पर कुछ पैसे का नुकसान भी हो सकता है। इसलिए इस बार फेस्टिव शॉपिंग के दौरान कोई भी बेशकीमती चीज खरीदते समय सावधानी बरतें और उस पर टैक्स के असर को समझने की कोशिश करें। 

 ऑफर - 1 खरीदें और 1 मुफ्त पाए जैसे लोकप्रिय फ्रीबीज ऑफर पर असर पड़ सकता है। इस साल आपको इस तरह के ढेर सारे फ्रीबीज ऑफर मुफ्त में मिलनेवाली चीजें देखने को नहीं भी मिल सकते हैं क्योंकि दी जानेवाली वस्तुओं के कुल मूल्य पर जीएसटी लगेगा। शून्य कीमत वाली वस्तुओं पर रिटेलर/मैनुफक्चरर को नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि वे मुफ्त में बेची गईं वस्तुओं पर इनपुट क्रेडिट का दावा नहीं कर पाएंगे और उन्हें इन वस्तुओं के कुल मूल्य पर लगने वाले टैक्स का बोझ खुद उठाना होगा।

इस साल आपको वस्तुओं पर सीधा डिस्काउंट मिलेगा जो खरीदार एवं विक्रेता दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए आइटम 1 पर 12% की दर से टैक्स लग सकता है यदि उसकी कीमत 1,000 रुपये से अधिक है। लेकिन यदि उसकी कीमत 1,000 रुपये से कम है तो सिर्फ 5% टैक्स ही लगेगा। इसलिए रिटेलर/मैन्युफैक्चरर अपने सामान की कीमत 1,000 रुपये से कम रखने की कोशिश करेंगे और इस तरह होने वाली 7% टैक्स की बचत का फायदा ग्राहकों को देने की कोशिश करेंगे। कपड़े, जूते, पैकेटवाली खाने-पीने की चीजें आदि खरीदते समय आपको इस तरह का फायदा देखने को मिल सकता है।

उम्मीद करता हु मेरा आज का यह आर्टिकल  Online Shopping Good Or Bad Ki Puri Jaankari Hindi Me  आप सभी को बहुत पसंद आया होगा। आज के लिए बस इतना ही आगे भी आप लोगो के लिए ऐसे ही पोस्ट लाता रहूँगा। आप इसी तरह मेरे साथ जुड़े रहे. क्योकि मेरे लिए आप सभी लोगो का साथ बहुत जरुरी है.

अगर आपको कोई परेशानी आये  तो आप मेरे मोबाइल Number 7017596641 पर कॉल करके मेरी Help ले सकते है. मुझे बहुत खुशी होगी आप की हेल्प कर के . पोस्ट अच्छी लगे आप को तो PLZ शेयर जरुर करे अपने मित्रो के साथ धन्यवाद  
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