Kaise Kare Char Dham Ki Yatra ? Char Dham Yatra Ki Puri Jankari

चार धाम यात्रा की जानकारी 

नमस्कार दोस्तों Welcome To My New Article  Kaise Kare Char Dham Ki Yatra ? Char Dham Yatra Ki Puri Jankari अपनी आज की पोस्ट के माध्यम से में आप लोगो को Uttrakhand के चार धाम की यात्रा की पूरी जानकारी दूंगा और ये भी बताऊंगा की आप किस तरह बहुत आराम से चार धाम की यात्रा कर सकते है अपने परिवार के साथ मेने चार धाम यात्रा कई बार करी है . चार धाम यात्रा का अपना अनुभव आप लोगो के साथ आज शयेर कर रहा हु तो चलिये शुरू करते है अपना आज का आर्टिकल जिस का नाम है Kaise Kare Char Dham Ki Yatra ? Char Dham Yatra Ki Puri Jankari

 Char Dham Yatra Ki Puri Jankari

जैसा कि आप सभी को लोगो को मालूम है मैं Haridwar का रहने वाला हु और Haridwar Uttarakhand में मौजूद है. वो ही Uttarakhan जहाँ ऊंची ऊँची पर्वत चोटियां, मनमोहक पहड़ों से बहते ठन्डे पानी के झरने, फूलो से सजी रंग बिरंगी घांटिया के साथ ऐसे अनगिनत द्रस्य मौजूद है. जो आपके मन को ऐसी शांति देगी जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते.

Uttarakhand की भूमि को देव भूमी के रूप में भी जाना जाता है. सभी हिन्दुओ के लिए यह सबसे ज्यादा पवित्र स्थान है. Uttarakhand की इसी देव भूमी पर चार ऐसे पवित्र स्थान मौजूद है. जहा हर हिन्दू अपने जीवन काल में इन स्थानों पर जाना चाहता है, Uttarakhand में मौजूद यह स्थान Char Dham के नाम से जाने जाते है.

उत्तराखंड में मौजूद इन चार धाम को बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के नाम से जाना जाता है. हर साल इन चार धाम की यात्रा करने देश के कोने कोने से करोडो लोग Uttarakhand आते है. इसी Uttarakhand में सिक्खों का पवित्र स्थान हेमकुंड साहिब भी मौजूद है. इन Char Dham के आलावा Haridwar और Rishikesh जैसी पवित्र जगह भी इसी Uttarakhand में मौजूद है. और भी बहुत सी ऐसी जगह Uttarakhand में मौजूद है. जो आपके भटके हुवे मन को जरूर शांति देगी. आज की पोस्ट के माध्यम से में आप लोगो को चार धाम के साथ साथ और भाई बहुत जगह है जिन के बारे में बताऊंगा 

NOT.. चार धाम में घुमने के अलवा और घुमने की जगह के बारे में भी बताऊंगा जेसे की टिहरी डेम ,श्री त्रियुगीनारायण मंदिर, पंच बद्री , नर नारायण पर्वत तप्त कुण्ड , काली मट , उखीमठ के ओंमकारेशवर मंदिर, और भी बहुत जगह है जहा जाने का मुझे समय मिला पोस्ट बड़ी है क्यों की सफर भी चार धाम यात्रा का है पोस्ट के अंत में आप लोगो को चार धाम यात्रा की रेट लिस्ट भी दे दूंगा और एक धाम की भी और दो धाम की भी मगर ये लिस्ट समय - समय पर बदलती रहती है यानि की रेट कम और ज्यदा होते रहते है .

Char Dham Yatra Opening Date - चार धाम यात्रा शुरू होने का समय 

उत्तराखंड में मोजोद चार धाम यात्रा हर साल मई में शरू होती है और नवम्बर तक चलती है चारो धामों के कपाट हर साल May के शुरू में सभी भक्तो के लिए खोल दिए जाते है. सबसे पहले Yamunotri or Gangotri Dham के कपाट खोले जाते है. उसके बाद Kedarnath Dham और सबसे लास्ट में Badrinath Dham के कपाट खोले जाते है.

चार धाम ओपनिंग डेट 2018 इस प्रकार है 

अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को है इस दिन से चार धाम की यात्रा शुरू हो जाएगी क्योंकि इस दिन गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुल जाएंगे। लेकिन इस साल कुछ ऐसा संयोग बना है कि केदारनाथ के कपाट अक्षय तृतीया के 11 दिन बाद 29 अप्रैल को और बदरीनाथ के कपाट अक्षय तृतीय के 12 दिन बाद 30 अप्रैल को खुल रहे हैं। जबकि आमतौर पर अक्षय तृतीय के दो-तीन दिन बाद केदारनाथ और इसके अगले दिन बदरीनाथ के कपाट खुल जाते हैं।  

तय कर लें कि कौन-कौन जाएगा


सबसे पहले ये तय कर ले की आप कितने जाने जा रहे है , यानि की बड़े कितने है बच्चे कितने है , और बुडे कितने है , और महिला कितनी है क्यों की बच्चो और महिला के संग कुछ समय ज्यदा लगता है चार धाम यात्रा मेरे हरिद्वार से शुरू होती है . वेसे तो हरिद्वार से चार धाम की यात्रा १० दिन की है अगर आप हरिद्वार के बहार से आ रहे है तो उसमे अपने आने जाने के दिन और ऐड कर ले , गंगा माता के डुबकी लगा के हरकी पोड़ी से गंगा जल भर के आप यात्रा का शुभ आरम्भ करे , जय गंगा माता की , जय देवभूमि उत्तराखंड की ,

Decide कर लें कि package लेना है या खुद से मैनेज करना है?


खुद से मैनेज करना इतना आसान भी नहीं है,आप चाहें तो किसी ट्रेवल कम्पनी से पॅकेज बुक कर सकते हैं या फिर आप मेरी मदद भी ले सकते है मेने अपना नंबर आप की हेल्प के लिए निचे दिया है , अपने से पूरा प्लान कर सकते हैं। पैकेज लेने के अपने प्लस माइनस हैं, पॅकेज लेने पर जहाँ आपको कुछ सोचना नहीं पड़ता वहीँ आपको पैसे भी अच्छे-खासे देने होते हैं, मगर आप यात्रा बहुत सही तरीके से करेंगे यदि आप ने पैकेज पूरा लिया है खासकर जब आप की फेमली हो साथ में .

पेसे का इंतजाम यात्रा के हिसाब से ज्यदा ही रखे 

आप पैसे यात्रा के हिसाब से ज्यदा ही रखे क्यों की कई बार आप को चार धाम में अपने आस पास की जगह घुमने का भी मन कर सकता है , और पहड़ो में मोसम भी बहुत जल्दी खारब , और सही होता है बारिश से ना डरे पाहड है कभी भी बारिश आ जाती है , कई बार पहाड़ गिर जाने के कारण आप को घंटो जाम में फसे रहना पड़ सकता है .

खाने पिने की चीजे हमेशा साथ रखे आप / दवाई 

पहड़ो में मोसम भी बहुत जल्दी खारब , और सही होता है बारिश से ना डरे पाहड है कभी भी बारिश आ जाती है कई बार पहाड़ गिर जाने के कारण आप को घंटो जाम में फसे रहना पड़ सकता है . इसलिए आप अपने साथ खाने के कुछ सामान जरुर साथ रखे जेसे फल , नमकीन , पानी , ब्रेड , मिटाई ,मैगी कप वाली , खजूर ,आदि , दवाई भी कुछ अपने साथ रखे यदि आप के साथ बच्चे और बुडे है जेसे , बुखार ,उलटी , डिहाइड्रेशन, aur अगर कोई बीपी या शुगर का पेशंट है तो उस की पूरी दवाई जरुर रखे .

अच्छे से पेकिंग करे सामान की ;

चूँकि ये धाम ऊँचे पहाड़ों में स्थित हैं इसलिए आपको अपने साथ गर्मी और ठंडी दोनों के हिसाब से कपड़े रखने होंगे। अगर आप मई-जून में जा रहे हैं तो दिन में तो बिना स्वेटर के काम चल जाएगा पर रात में गरम कपड़ों की ज़रूरत पड़ेगी। इसलिए सभी यात्री कम से कम दो जोड़ी स्वेटर/जैकेट, इनर, टोपी-मफलर आदि रख लें। छोटे बच्चों के लिए दस्ताने भी रख लेना सही रहेगा।


Daily use के आइटम्स/ रेन कोट 

ब्रश, शेविंग किट, शैम्पू , क्रीम, बॉडी लोशन, पेपर सोप, इत्यादि।पहाड़ों में अक्सर दोपहर में बारिश होने लगती है इसलिए आप रेन कोट ले लें तो बेहतर होगा। वैसे आप चाहें तो धाम पर पहुँच कर भी सिर्फ 20 रुपये से लेकर हज़ार रूपये तक के रेन कोट खरीद सकते हैं।

पॉलिथीन / पन्नी: जब आप गाडी में बैठ कर पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपको उल्टियाँ आ सकती हैं, ऐसे में आपके पास मौजूद पन्नियाँ बहुत काम आती हैं। कुछ लोग गाडी से सिर निकाल कर भी उल्टी कर लेते हैं पर ये ऐसा करना रिस्की हो सकता है क्योंकि वहां के रास्ते बहुत सकरे और घुमावदार होते हैं और ऐसे में गाड़ियाँ एक दुसरे के बहुत करीब से गुजरती हैं, इसलिए कभी हाथ या सर बाहर न निकालें।
मेरा अनुभव है कि अधिकतर लोगों को यात्रा के पहले-दुसरे दिन ही उल्टी महसूस होती है और बाद में आप comfortable हो जाते हैं।

जुटे चप्पल रख ले ;

आप ज्यादातर समय चप्पल या सैंडल में ही आराम महसूस करेगे लेकिन चढ़ाई के वक़्त जूते पहनना ज़रूरी है, इसलिए जूते-चप्पल ज़रूर रख लें।

अन्य आवश्यक सामान ;

Torch: तीन-चार लोगों के बीच में 1 टॉर्च ज़रूर रख लें। पहाड़ों में कई बार बिजली नहीं आती और कभी-कभी चढ़ाई करते वक़्त या उतरते समय भी अँधेरा हो जाने पर टॉर्च बहुत काम आते हैं।

सफर की सुरवात ;

सीजन के हिसाब से आपको ये गाड़ी 3000 per day से 6000 per day पर मिल सकती है। बेहतर होगा कि आप हरिद्वार पहुँच कर ही बुक करे गाड़ी और अगर आपका बजट कम है तो आप सरकारी या प्राइवेट बसों से भी यात्रा कर सकते हैं।
हरिद्वार में भी घूमने के लिए मनसा देवी मंदिर और चंडी देवी मंदिर ,हर की पौड़ी और अन्य दर्शनीय स्थान हैं। हर की पौड़ी अपनी शाम की गंगा आरती के लिए प्रसिद्द है। तो चलिए शुरू करते है अपना सफर चार धाम यात्रा का बोलो गंगा माता की जय बद्री नारायण जी की जय जय बाबा केदारनाथ की .

हमारी यात्रा में मेरे साथ मेरे गुरु जी मित्र थे जिन के नाम इस प्रकार है , गुरु जी महंत नेपाली बाबा जी , घनश्याम जी सांखला  , हैप्पी शर्मा , मयंक भरद्वाज जी , पिंकू यादव , राजेन्द्र जोशी जी , मोहित शर्मा , रमेश जी , और डॉ जेन जी और में  .

बद्रीनाथ मंदिर दर्शन 

बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोले जाने की तिथि बसंत पंचमी के मौके पर टिहरी के पूर्वराजाओं के महल में तय होती है, इसकी कोई निश्चित तिथि नहीं है। राजपुरोहितों द्वारा लग्न निकाले जाते हैं। इसमें सामान्यतः बैशाख माह की उपयुक्त तिथि देखी जाती है। पूर्व राजा की सहमति से निकाले गए दिनों में से शुभ दिन तय किया जाता है। 

गुरु जी नेपाली बाबा जी 

बद्रीनाथ मंदिर दर्शन मित्रो के साथ 


बद्री नाथ मंदिर की कुछ महत्व पूर्ण बाते 

बदरीनाथ धाम मंदिर के कपाट 30 अप्रैल की सुबह 4.30 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। चारधाम की यात्रा में बदरीनाथ धाम काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे बसा यह मंदिर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। आइए जानते हैं बदरीनाथ मंदिर के बारे में यह जरूरी बातें...

बदरीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित और सतयुग का पावन धाम माना जाता है। बड़ी बात यह है कि बदरीनाथ के दर्शन से पूर्व केदारनाथ के दर्शन करने की बात कही जाती है। बदरीनाथ मंदिर के कपाट भी साल में सिर्फ छह महीने के खुलते हैं जो अप्रैल के अंत या मई के प्रथम पखवाड़े में दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। लगभग 6 महीने तक पूजा-अर्चना चलने के बाद नवंबर के दूसरे सप्ताह में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

बद्री नाथ 2018 में खास 

इस बार तीर्थयात्रा को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार पंजीकरण व्यवस्था को यात्रियों के अनुकूल बनाने के कार्य कर रही है। ऋषिकेश से लेकर सभी धामों के बीच पड़नेवाले महत्वपूर्ण स्थानों पर पंजीकरण की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा रहा है। इससे बदरीनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए घंटो लाइन में खड़े रहने से मुक्ति मिलने की बात कही जा रही है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस बार मंदिर में प्रवेश के लिए कम्प्यूटरीकृत टोकन सिस्टम की व्यवस्था फिर से शुरू करने की योजना बनायी है। इस बार बदरीनाथ धाम में प्रवेश के लिए तीर्थयात्रियों को पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण करते समय तीर्थयात्रियों को प्रवेश के लिए टोकन दिया जाएगा, जिसमें प्रवेश के लिए गेट पर पहुंचने का समय निर्धारित होगा। इससे तीर्थयात्री लाइन में खड़े रहनेवाले समय का उपयोग बद्रीनाथ धाम के अन्य स्थलों के दर्शन के लिए भी कर सकेंगे। 

तप्त कुण्ड की विषेता 

तप्त कुण्ड मित्रो के साथ 
बदरीनाथ मंदिर में एक कुंड है, जिसे तप्त कुंड कहा जाता है, जिसमें से गर्म पानी निकलता है। इस कुंडों में स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। इसी कुंड से निकलने वाली गर्म पानी की धारा दिव्य शिला से होते हुए दो तप्त कुंडों तक जाती है, जिसमें यात्री स्नान करते हैं। माना जाता है गर्म पानी के कुंड में स्नान से करने से शरीर की थकावट के साथ ही चर्म रोगों से भी निजात मिलती है। इस पानी में गंधक की मात्रा काफी ज्यादा है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इन तप्त कुंडों में स्नान के लिए भीड़ जुटती है। और इस चीज में मेने खुद अनुभव किया है कई बार आप निचे फोटो भी देख सकते है 

तप्त कुण्ड में और मयंक भाई 

भगवान विष्णु ने माँगा था ये स्थान शिव जी से 

बदरीनाथ धाम के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है की कलियुग में वे अपने भक्तों को बद्रीनाथ में मिलेंगे। पुराणों में बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की उपमा दी गई है क्योंकि यहां साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं। बदरीनाथ के बारे यह भी माना जाता है कि यह कभी भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास हुआ करता था। रोते हुए बाल रुप में आए विष्णु भगवान ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था। इस तरह शिव और पार्वती वो जगह छोडकर चले गए और विष्णु का वास वहां हो गया।

नर नारायण पर्वत का महत्व 

बदरीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच बसा है। इसे नर नारायण पर्वत कहा जाता है। कहते हैं यहां पर भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने तपस्या की थी। नर अगले जन्म में अर्जुन और नारायण श्री कृष्ण हुए। बद्रीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं जो रावल कहलाते हैं। यह जब तक रावल के पद पर रहते हैं इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। रावल के लिए स्त्रियों का स्पर्श भी पाप माना जाता है।


नर नारायण पर्वत 
हरिद्वार से बद्री नाथ मंदिर तक कुछ मनमोहक फोटो जो की मेरे दुवारा खिची गयी है साथ में मेरे मित्र भी है 



बद्रीनाथ जी मंदिर 


रस्ते की कुछ pc


मनमोहक दर्शय 


अलकनंदा नदी 



पंच बद्री में से एक आदि बद्री नाथ मंदिर मित्रो के साथ 



ले ले रे सेल्फी टाइम 


आदि बद्री नाथ रस्ते की फोटो 
फोटो तो बहुत है अगर डालने लगा तो बहुत देर हो जाएगी फिर कभी आप को बताऊंगा पंच बद्रीनाथ के बारे में 


केदारनाथ जी दर्शन 

केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि केदारनाथ के रावल के निर्देशन में उखीमठ में पंडितों द्वारा तय की जाती है। इसमें सामान्य सुविधाओं के अलावा परंपराओं का ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि कई बार ऐसे भी मुहूर्त भी आए हैं जिससे बदरीनाथ के कपाट केदारनाथ से पहले खोले गए हैं। जबकि आमतौर पर केदारनाथ के कपाट पहले खोले जाते हैं। 


केदारनाथ जी 
इस बार चारधाम यात्रा में से एक धाम केदारनाथ पर हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी आ रहे है. जो की पिछली बार भी आये थे आप यहाँ क्लिक कर के 2017 की वो विडियो देख सकते है जब प्रधानमंत्री जी आये थे केदारनाथ 

आगामी 29 मई को Kedarnath Dham के कपाट खुलने के Time 6.15 मिनट प्रधान मंत्री जी Kedarnath Dham में ही मौजूद होंगे. और वो कपाट खुलने के बाद केदारनाथ जी के दर्शन भी करेंगे। प्रधान मंत्री के अलावा हमारे देश के राष्ट्रपति भी बद्रीनाथ के दर्शन कपाट खुलने के टाइम दर्शन करेंगे शयद .

केदारनाथ मंदिर का इतिहास 

इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का इतिहास संक्षेप में यह है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया। यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर स्थित हैं।

पंचकेदार की कथा - महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। भगवान शंकर के दर्शन के लिए पांडव काशी गए पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान हो कर केदार में जा बसे। दूसरी ओर, पांडव भी लगन के पक्के थे वे उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। अत: भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतध्र्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है। यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं।


पंच केदार मंदिर 



अपने बड़े भाई घनश्याम जी के साथ 


मंदिर के बारे में जानकारी 

दर्शन का समय 

केदारनाथ जी का मन्दिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रात: 6:00 बजे खुलता है दोपहर तीन से पाँच बजे तक विशेष पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मन्दिर बन्द कर दिया जाता है।पुन: शाम 5 बजे जनता के दर्शन हेतु मन्दिर खोला जाता है।मुख वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 बजे से 8:30 बजे तक नियमित आरती होती है।रात्रि 8:30 बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मन्दिर बन्द कर दिया जाता है।

केदार नाथ पैदल रास्ता 

यात्रा समय 24 अक्तूबर 2016


इस ढाबे में रुक कर चाय पी 

केदारनाथ जी यात्रा शुरू हुई और हम लोग बिच में नाश्ता करने के लिए रुके। हम सभी लोग सुबह जल्दी निकल गए थे. तो हम सभी ने कुछ खाया पिया नहीं था. ऊपर जो आप Photo देख रहे हो हम वहा रुके और अपने साथ लाये हुवे नाश्ते को इसी ढाबे पर बैठकर खाया. इस ढाबे वाले से हम लोगो ने केवल चाय बनवायी थी. क्या कमाल की चाय बनाई थी इसमें अदरक डाल कर मजा आ गया था.


हम अपनी सेल्फी ले रहे है और मयंक भाई हमरी phot



ये मस्ती का समय 
नास्ता करके हम लोगो ने अपनी यात्रा फिर से शुरू करी. Kedarnath Yatra लम्बी थी तो हम लोग बिच में बहुत सी जगह रुक रुक कर गए. मेरे दोस्तों ने अपनी फोटो भी खिचवाई। और साथ ही उन सभी ने अपनी सेल्फी भी ली. इन लोगो की मस्ती आप ऊपर फोटो में देख सकते हो.

Char Dham Yatra Registration

चार धाम यात्रा रजिस्टेशन 

Chardham या किसी भी Dham पर जाने से पहले सभी को अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाना होता है. तो हम लोगो ने भी अपना रजिट्रेशन करवाया जो की बिलकुल Free था. 

रिजस्ट्रेशन करवा कर हम लोगो ने अपनी यात्रा फिर से शुरू करी और रास्ते में आने वाले मनमोहक सीन को मैंने अपने Mobile के कैमरे में कैद किया। मैं आप सभी को बताना चाहूंगा केदारनाथ धाम पर जितनी भी फोटो मैंने खींची है वो मैंने अपने Mobile Phone के द्वारा ही खींची है. हलाकि मैं Digital कैमरा भी अपने साथ ले गया था. लेकिन उसकी जरूरत कम पड़ी मुझे.


नहाने का मन किया था मगर टंड ने नहाने नहीं दिया 





रस्ते की फोटो 



जय हो बाबा की दोस्त मस्ती के मुड में 

Kedarnath Dham Yatra के दौरान हमे बहुत से जगह रुकने का मौका मिला। कही पाहडो से बहते हुवे झरने। कही दूर वादियों में दिखती हुई बर्फ की चोटिया। कमाल के नजारे देखने को मिले Kedarnath Yatra के दोरान हमने . कुछ बहते हुवे झरनो की फोटो आपके लिए ऊपर दी है. और उन्ही झरनो के बिच मेरा एक साथी भी मौजूद है.

सुबह 7 बजे के निकले हुवे हमे काफी टाइम हो गया था तो हम लोग लगभग शाम को 5 बजे के आसपास सीतापुर पहुंच गए जो की सोनप्रयाग से कुछ किलोमीटर पहले ही है. मैं आपको बताना चाहूंगा सोनप्रयाग Kedarnath Dham Yatra का वो पहला पड़ाव है जहा सभी यात्री रुकते है. और यही से केदारनाथ की पैदल यात्रा शुरू होती है. 

पहले केदारनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा गोरी कुंड से शुरू होती थी. लेकिन 2013 में आयी आबदा के बाद गोरी कुंड पूरी तरह तबाह हो गया जिसकी वजह से सोनप्रयाग को ही Kedarnath Dham Yatra का पहला पड़ाव बना दिया गया है.

हम लोग अपने टाइम के हिसाब से थोड़ा जल्दी पहुंच गए थे तो सीतापुर से पहले ही हमे बहुत से Helicopter वाले भी मिले। जिन्होंने हमे बताया की वो 5000 रूपये 1 Member के हिसाब से हमको ऊपर Kedarnath Dham में उतार देंगे। और सुबह Morning में वापिस सीतापुर में ही उतार देंगे। लेकिन हम लोग Helicopter से जाने के बिलकुल भी विचार में नहीं थे. तो हमने उन्हें मना कर दिया।

अब चुकी हम जल्दी सीतापुर आ गए थे तो हमारे पास बहुत टाइम था कही और जाने का. लेकिन उस टाइम Kedarnath की यात्रा शुरू करने का टाइम नहीं था. क्युकी शाम को 6 बजे के आसपास सोनप्रयाग से रास्ते बंद कर दिए जाते है. ज्यादा टाइम होने की वजह से हमने कही और जाने का विचार किया.

NOT...सीजन के समय हेलिकॉप्टर का रेट 10000 से 11, 12, 13,हजार पर मेंबर तक होता है यह सिर्फ जाने का रेट है ऑफ सीजन यानि की अक्तूबर में आप को 5 से 6 हजार में निचे से ऊपर तक का किराया होता है यह समय समय में घटता और बढता है .

Shri Triyuginarayan Temple

triyuginarayan मंदिर 


कुछ और घुमने लायक जगह 


मंदिर triyuginarayan

पूजा की जगह 
सीतापुर के पास ही एक मंदिर है जिसका नाम है Shri Triyuginarayan Temple (श्री त्रियुगीनारायण मंदिर) इस मंदिर के बारे में बोला जाता है कि भगवान शिव जी ने पार्वती माता के साथ इसी मंदिर में फेरे लिए थे. ये मंदिर सत युग के समय से यहाँ है ।यहाँ जब आप जायेंगे तो आप को देखने को मिलेगा की यहाँ पर 24 घंटे एक हवन कुण्ड जलता रहता है कहते है की ये स्त्युंग से ऐसे ही है और भी बहुत कुछ है यहाँ देखने को आप भी एक बार जरुर जाए अभी तो आप ऊपर फोटो देखिये।

guest house

मंदिर के दर्शन करने के बाद हम सीतापुर वापिस आये और वाला एक Guest House में रुके। यह बहुत ही साफ़ सुथरा गेस्ट हॉउस था. मजा आ गया यहाँ रुक कर. सुबह हम इसी गेस्ट हॉउस में गर्म गर्म पानी से नहा कर अपनी यात्रा की शुरुआत की.

रात को गेस्ट हॉउस में रुकने के बाद हम Morning में 7 बजे सोनप्रयाग के लिए गाडी में बैठकर निकल गए. मौसम बिलकुल साफ़ था. तेज धुप थी मैं मन ही मन सोच रहा था कि केदारनाथ धाम में तो अक्सर बर्फ पड़ती है. बढ़ते प्रदूषण के कारण मौसम में इतना बदलाव आ गया है की यहाँ भी इतनी तेज धुप निकल रही है. मैंने मन ही मन सोचा काश अगर Kedarnath धाम में बर्फ पड़ जाती तो मजा आ जाता।

गाड़ी वाले से मन की बात करते हुवे 

हम गाडी से गौरीकुंड पहुंचे जैसा आपको ऊपर दिखाई दे रहा है. यह Kedarnath Dham yatra का पहला पड़ाव है जहा से हमे अपनी पैदल यात्रा शुरू करनी है. अगर आप पैदल नहीं जाना चाहते तो यही से घोड़े वाले भी मिलते है. जो 1500 रूपये लेकर आपका आना जाना बुक कर लेते है. नोट .. मगर ऑफ सीजन में सीजन के समय कोई फिक्स चार्ज नहीं है इन का 

लेकिन मेरी सलह माने तो आप इनकी सर्विस का इस्तेमाल ना करे. क्युकी इन लोगो को हमारी कोई परवाह नहीं होती। शुरू शुरू में तो यह सभी अपने घोड़े के साथ चलते है. लेकिन आगे जाकर घोड़े को ऐसे ही छोड़ देते है. और इन लोगो की सबसे बड़ी कमी होती है. ये अपने साथ कम से कम 7 या 8 घोड़ो पर सवारी लेकर चलते है. Kedarnath dham में घोड़े की सवारी करना बहुत खतरनाक है.


पैदल मार्ग 


पैदल मार्ग 


पैदल मार्ग 


आराम का समय तोडा 




उपर से लिया गया फोटो 

हम लोगो का विचार तो पैदल चलने का ही था तो हमने अपनी Kedarnath Dham Yatra पैदल ही शुरू करी. अपनी पैदल यात्रा के दोरान हमे बहुत से मनमोहक सीन देखने का मोका मिला। रास्ते में बहुत से झरने देखने का मोका मिला। अपनी कुछ यादगार फोटो मैं आपको ऊपर दे रहा हु. आप भी देखे केदारनाथ के कुछ मनमोहक फोटो। 


केदार नाथ पद यात्रा 


फोटो टाइम 
पैदल यात्रा के दोरान ही हमने गोरीकुंड भी देखा जो की आपदा के दोरान बिलकुल ही खत्म हो गया था. ऊपर जो आपको फोटो दिखाई दे रही है. जिसमे आपको बड़े बड़े पथ्थरो के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है. वो गोरीकुंड ही है जहा आपदा से पहले आलिशान होटल बने हुवे थे. जिनमे लोग रात को रूककर अगले दिन अपनी यात्रा की शुरुआत करते थे. लेकिन आपदा के बाद गोरीकुंड का नमो निशान ही मिट गया. खेर यह तो होना ही था. चलिए अब आगे चलते है क्युकी यहाँ मेरे पास बहुत कुछ है बोलने के लिए. लेकिन मैं केवल अपनी यात्रा से जुडी बात ही करूँगा।   

शुबह हम लोग जल्दी ही अपने रूम को छोड़कर यात्रा के लिए निकल गये थे. तो हम सभी खाली पेट थे मेरा विचार तो खाली पेट यात्रा करके केदारनाथ जी के दर्शन करने के बाद ही कुछ खाने का विचार था. मगर एसा हो ना सका अंत में मेने खाना खा ही लिया काफी थक गये थे हम 



रस्ते की फोटो 


नये रस्ते की फोटो पुराना रास्ता अब नहीं रहा 
2013 में वहां आई तबाही के कारण मन में कुछ डर भी था और जब दोपहर में चढ़ाई करते वक़्त तेज बारिश होने लगी तो डर और भी बढ़ गया। यहाँ की चढ़ाई सबसे कठिन थी। तबाही के बाद जो नया रास्ता बना है वो पहले से लम्बा है, अगर (SDRF) के जवानो की मानें तो जो रास्ता पहले 14 किलोमीटर का था अब वो 22 km से अधिक का हो गया है। और ऊपर से कहीं-कहीं पे ये बहुत खराब भी है और कई जगह खड़ी चढ़ाई भी है। इसलिए मेरी समझ से, अगर आप पैदल जाते हैं तो चारो धामों में ये सबसे कठिन है।

Kedarnath Snowfall


केदारनाथ रस्ते पर snowfall मजा आ गया 
धीरे धीरे ये बादल और गहरे होते गए. और देखते ही देखते हलकी हलकी बारिश शुरू हो गयी. बारिस होने से रास्ते में टेम्प्रेचर 0 डिग्री से निचे चला गया. अब बारी थी बर्फ़बारी Snowfall की. बस देखते ही देखते बारिश की बूंदो ने बर्फ़बारी का रूप ले लिया। मेरी सोची हुई बात भगवान ने सुनी और पूरी कर दी. आप विडियो भी देख सकते है यहाँ क्लिक कर के

लेकिन हम लोग तो आधी अधूरी तैयारी के साथ यात्रा पर निकले थे किसी ने भी नहीं सोचा था की टेम्प्रेचर 0 डिग्री से निचे पहुंच जाएगा और बर्फवारी हो जायेगी। जब बर्फ़बारी शुरू हुई तो पुरे रास्ते में हमे कोई भी ऐसी जगह नहीं मिली जहा हम अपने आप को गिरती बर्फ से बचा सकते। ठण्ड के मारे हम सभी की कपकपी छूट रही थी. और ऊपर से हमारे ऊपर खूब बर्फ गिर रही थी. साथ में ठंडी ठंडी हुवा। उस टाइम हमे महसूस हुवा जब लोग बर्फीले तूफ़ान में फसते है तो कैसा एहसास होता है. केदारनाथ धाम के पास पहुंच कर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से हालत और खराब होती है.

NOT.. अगर आप परिवार या बच्चो के साथ यात्रा कर रहे है तो प्ल्ज़ पूरा सामान जरुर ले जाए . में तो आप को शलाह दूंगा की आप हेलिकॉप्टर से ही जाए भले ही पैदल वापस आ जाए अगर आप रोज चलते है तो वरना हेलिकॉप्टर से ही वापस भी आये मोसम कभी भी बदल जाता है पहड़ो में दवाई जेसे बुखार उल्टी की जरुर साथ में रखे और गर्म कपडे भी अगर आप सुबह हेलिकॉप्टर से जाते हैऔर हेलिकॉप्टर से ही वापस आते है तो दिन तक दर्शन कर के आप निचे आ जायेंगे 

हम तो बस शिव भगवान से यह ही प्राथना कर रहे थे की बस एक बार सही सलामत भगवान केदारनाथ के दर्शन हो जाए. उसके बाद भले ही कुछ भी हो जाए. खेर गिरती बर्फ में हम आगे बढ़ते रहे पूरा शरीर बर्फ से ढक चूका था. ना कोई सर पर टोपा ना कोई हाथो में दस्ताने। बस चले ही जा रहे थे भगवान की एक झलक पाने के लिए.

3 घंटे बर्फ में पैदल चलने के बाद रास्ते में एक चाय की दूकान दिखी वही रुक कर हम लोगो ने चाय  पी तब मुझे थोड़ी बहुत आगे चलने की हिम्मत मिली।

उसी दूकान वाले से हमने बर्फवारी के बारे में भी पूछा तो उसमे बताया यह सीजन की पहली बर्फवारी है इस से पहले यहाँ कोई बर्फ नहीं पड़ी. तब मुझे एहसास हो गया भगवान ने मेरे मन की बात सुन ली थी तब ही मुझे बर्फवारी के दर्शन भी करा दिए और उसी में चलते रहने को मजबूर भी कर दिया।

खेर ठण्ड से कपकपाते हुवे सुबह 7 बजे के चले हुवे हम लोग शाम को 5 बजे के आसपास हम लोग Kedarnath Dham पहुंच गए. कहा हमारा प्लान एक दिन में यात्रा पूरी करने निचे सीतापुर में जाने का था और कहा हम लोग पुरे दिन यात्रा करके शाम को केदारनाथ धाम पहुंचे।

खेर हमारे सामने हमारे भगवान केदारनाथ का मंदिर था और चारो तरफ बर्फ से ढकी हुई चोटियां थी स्वर्ग का नजारा था जब हम केदारनाथ धाम पहुंचे। केदारनाथ धाम पहुंच कर सबसे पहले हमने अपने लिए कमरा बुक किया और फिर चाय पी. जिस टाइम हम पहुंचे उस टाइम मंदिर बंद था.


केदारनाथ जी मंदिर दर्शन मित्रो के साथ 



मंदिर दर्शन 
चाय पीने के कुछ टाइम के बाद ही मंदिर खुल गया अब बारी थी दर्शन करने की ऊपर जो आप फोटो देख रहे हो यह मंदिर के बाहर की फोटो है. सुबह की आरती के बाद बस बाहर से ही दर्शन किये जाए है. मंदिर के अंदर जो केदारनाथ भगवान की शीला मौजूद है उनके दर्शन केवल morning में 5 बजे ही किये जा सकते है. हम लोग बाहर से ही हाथ जोड़कर अपने आप को नसीब वाला मन रहे थे. और इन्तजार था अंदर शीला के दर्शन करने का उसके लिए हमे अगले दिन सुबह 5 बजे आना था. खेर जब केदारनाथ धाम आये है तो सुबह मॉर्निंग में उठकर दर्शन भी करेंगे।

Kedarnath Dham में आपदा के फोटो 

मंदिर के बाहर से ही दर्शन करने के बाद हम लोग कुछ फोटो ग्राफ़ी करने लगे. शाम के 6 बजे के आसपस होने वाले थे तो रौशनी ज्यादा नहीं थी. फिर भी मैंने अपने मोबाइल फ़ोन से ही फोटोग्राफी करी. केदारनाथ धाम में अभी भी आपदा के निशान तरो ताजा थे चारो तरफ केवल बड़े बड़े पथ्थर। और उन पथ्थरो के निचे दबे हुवे मकान होटल सब वैसा का वैसा ही पड़ा था केदारनाथ धाम में. आपदा के कुछ फोटो आपको निचे दे रहा हु. ये सभी फोटो मैंने अपने मोबाइल से ही खींचे है.

बड़े बड़े पथर के बिच दबे होटल 

आपदा की कुछ तस्वीर सब नहीं डाल रहा हु कुछ ही डाली है 

आप ऊपर दिए गए फोटो में केदारनाथ धाम पर हुई घटना को देख सकते हो. मैं तो अपनी आँखों से इतनी बड़े बड़े पत्थरो को देखकर सोच रहा था जब यहाँ गागा के रूप में पानी आया होगा तो यहाँ केसा नजारा होगा। जब इतने बड़े बड़े पत्थर पानी के साथ बह कर आ सकते है. तो उन इंसानो के साथ क्या हाल हुवा होगा। जिन्होंने इस केदारनाथ धाम पर अपनी जान गवा कर. स्वर्ग का रास्ता तय किया। फोटो तो मैंने बहुत खींची थी केदारनाथ धाम की लेकिन मैं आप लोगो के बिच कम ही फोटो दे रहा हु.


 पुरे दिन पैदल बर्फवारी में चलकर सबकी हालत बहुत खराब थी. हम लोग 6.30 बजे के करीब ही अपने रूम में चले गए. और जाते ही पड़ कर सो गए. पूरी रात भर केदारनाथ में बर्फवारी होती रही और हम लोग ठण्ड के मारे अपने रूम में कपकपाते रहे. इन्तजार था बस सुबह होने का.

हम सभी सुबह 4.30 बजे उठे और 5 बजे के करीब केदारनाथ जी के मंदिर में पहुंचे। वहा देखा तो बहुत से लोग मंदिर के अंदर मौजूद थे जो भगवान केदारनाथ शिला की पूजा कर रहे थे. हम लोग जैसे ही मंदिर के बाहर पहुंचे। एक पंडित जी आ गए हमारे पास वो ही हमे मंदिर के अंदर ले गए और उन्होंने ही हमसे मंदिर में मौजूद भगवान केदारनाथ जी की बहुत बड़ी शिला की पूजा करवाई। पहली बार अपनी आँखों से केदारनाथ जी के दर्शन किये। जो एक दिन पहले हमारे ऊपर बिता जो हमारी थकावट थी. वो सब खत्म हो गयी. भगवान भोलेनाथ के दर्शन करके।

सुबह के 5.45 तक हम लोग पूजा कर चुके थे. अब हम सभी ने अपने अपने फोन निकाल कर अपने परिवार वालो से बात करी. मैं आपको बताना चाहूँगा मेरे मोबाइल में Airtel और Jio का सिम था यकीन मानिये केदारनाथ धाम में केवल एक ही Mobile कम्पनी के टावर आ रहे थे. वो था Jio फुल टावर थे  4 G के और किसी भी कम्पनी के टावर नहीं थे केदारनाथ में. सच में Jio जेसी कम्पनी ने बहुत ही कम टाइम में अपनी अलग पहचान बना ली है. Kedarnath Dham में फुल टावर के लिए Jio को मेरा सलाम. 

Kedarnath Dham में Helicopter की सर्विस 

केदारनाथ में चारो तरफ बर्फ ही बर्फ 

केदारनाथ में सुबह के नज़रे 


सब फोटो मोबाइल से ली गयी है यानि की one plus 2 से 

अब बस हम लोगो की वापिसी की तैयारी थी. हम लोग इतने थके थे की हमारी पैदल निचे जाने की हिम्मत नहीं थी. हम सभी ने फैसला किया की हम लोग वापिस helicopter से जायेंगे। बस हम लोगो ने चाय पी और निकल पड़े Helicopter के लिए. जहा Helicopter खड़ा होता है वह पहुंचे तो देखा वहा तो पहले से ही बहुत से लोग खड़े है. जिन्होंने एक दिन पहले की बुकिंग करवाई हुई थी.

हम लोगो ने बड़ी मुश्किल से अपने लिए 2500 रूपये पर मेंबर के हिसाब से Helicopter बुक किया और इन्तजार करने लगे Helicopter के आने का. इन्तजार काफी लम्बा था तो मैंने फिर से अपना Mobile बाहर निकल लिया। और लगा मनमोहक द्रश्य को अपने मोबाइल में कैद करने को. ऊपर जो आप फोटो देख रहे हो ये Morning की ही फोटो है.

फोटोग्राफी करते करते मेरे साथी ने मुझे सुचना दी कि Helicopter वालो ने हमारे पैसे वापिस कर दिए है. उनके पास सीट नहीं है. हम सभी दुबारा से हेलीकाप्टर वाले के पास गए और अपनी मजबूरी बताई लेकिन उन लोगो के लिए हमारी मजबूरी कोई मायने नहीं रखती थी. हम लोगो को चाज पड़ताल के बाद पता चला की अब ये लोग एक मेंबर के 3000 रूपये ले रहे है. जो 3000 रूपये देगा उसे ही सीट मिलेगी।

केदारनाथ में भीड़ बहुत ज्यादा थी जिसकी वजह से Helicopter वालो के लिए पैसा कमाने का अच्छा मौका था. उन्हें लोगो की मज़बूरी की परवा नहीं थी बल्कि उन्हें पैसा कमाना था खेर हम लोगो की पैदल निचे जाने की हिम्मत नहीं थी तो हम चारो ने 3000 रूपये पर मेंबर के हिसाब से 12000 रूपये उस हेलीकाप्टर वाले को देकर अपनी सीट बुक कर ली.


केदारनाथ में हेलिकोप्टर उतरता 
इसी हेलिकोप्टर से हम सब निचे आ गए 
थोड़े टाइम के बाद ही Helicopter आ गया ऊपर आप फोटो में देख सकते हो. पहली बार हम लोग किसी Helicopter में बैठे। Helicopter में वजन के हिसाब से सीट पर बैठाया जाता है. जो लोग हल्के होते है उन्हें आगे पायलेट के पास बैठा दिया जाता है. और जो लोग भारी होते है उन्हें पीछे की सीट पर बैठाया जाता है.

जब Helicopter उड़ा तो मजा आ गया ऊपर से निचे का नजारा देख कर. मात्र 10 मिनट में ही Helicopter ने हमे सीतापुर उतर दिया। जिस kedarnath dham yatra को हमने पुरे दिन पैदल चल कर पूरा किया। उस यात्रा का सफर केवल 10 मिनट में एक Helicopter ने पूरा कर दिया।भले ही हमारे 3000 रूपये सवारी के हिसाब से पैसे खर्च हो गए थे लेकिन हम लोग टाइम से निचे वापिस आ गए और उसी टाइम अपनी गाडी में बैठकर आगे गंगोत्री जी की यात्रा में निकल गए 

Meri Kedarnath Dham Yatra की पोस्ट बहुत ज्यादा लम्बी हो गयी है. करण चार धाम में सबसे ज्यदा दुर्गम यात्रा आज के समय में केदारनाथ जी की हो गयी है पैदल यात्रा के हिसाब से हेलिकोप्टर के हिसाब से नहीं अब अपनी पोस्ट को यही विराम देता हु. Kedarnath Dham Yatra से जुड़ा अगर आपके मन में कोई भी सवाल हो तो आप मुझे मेरे Mobile Number 7017596641 पर फोन करके पूछ सकते हो. मुझे खुशी मिलेगी केदारनाथ से जुडी बात आप लोगो को बताने में. चलिए अब में चलता हु. मिलता हु अपनी अगली पोस्ट में. मेरी इस पोस्ट को अपने Facebook और Whatsapp पर जरूर शेयर करे. ताकि हर कोई भगवान भोलेनाथ की महिमा को महसूस कर सके. और केदारनाथ धाम आकर भगवान के दर्शन कर सके. तो एक बार दिल से बोलिये। जय बाबा केदारनाथ जी की ..

NOT ... आप सब के लिए 2 धाम की विडियो भी बनायीं है जो आप यहाँ क्लिक कर के देखा सकते है विडियो अगर पसंद आये तो प्ल्ज़ शेयर जरुर करे धन्यवाद आपका 


गंगोत्री धाम दर्शन 

गंगोत्री माता मंदिर 
गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थान है। गंगाजी का मंदिर, समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थान उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18 वी शताब्दी के शुरूआत में किया गया था वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था। प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनो के बीच पतित पावनी गंगा मैंया के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है। गंगोत्री का पतित पावन मंदिर भी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलता है और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद होते है।

गंगोत्री मंदिर का इतिहास 

गंगोत्री शहर धीरे-धीरे उस मंदिर के इर्द-गिर्द विकसित हुआ जिसका इतिहास 700 वर्ष पुराना हैं, इसके पहले भी अनजाने कई सदियों से यह मंदिर हिदुओं के लिये आध्यात्मिक प्रेरणा का श्रोत रहा है। चूंकि पुराने काल में चारधामों की तीर्थयात्रा पैदल हुआ करती थी तथा उन दिनों इसकी चढ़ाई दुर्गम थी इसलिये वर्ष 1980 के दशक में गंगोत्री की सड़क बनी और तब से इस शहर का विकास द्रुत गति से हुआ।


मित्र हैप्पी सेल्फी के मुड में ले भाई सेल्फी 
ग्लेसियर से गंगा गौमुख में प्रकट होती है।जिस प्रकार का वर्णन शास्त्रो में गंगा का मिलता है उसका पत्यक्ष प्रमाण यहाँ गंगोत्री में देखने को मिलता है।ऐसा लगता है जैसे देवाधिदेव महादेव ने अपनी स्वर्णिम जटा को गोल में घुमाकर इस गौड़ी कुण्ड में एक लट से गंगा को इस कुण्ड में निचोड़ दिया है। यहाँ से भयंकर निनाद करती हुई पहाड़ों के सीना को चिड़ती हुई आगे की ओर भागती है और यहाँ इसे भागीरथी के नाम से पुकारा जाता है।वैसे देवप्रयाग में सात नदियों की धारा मिलकर गंगा बनती है। इन सब श्रेष्ठ जीवन दायनी देव नदियों के नाम कमशः – भागीरथी, जाह्नवी, भीलगंगा, मंदाकिनी, ऋषि गंगा, सरस्वती और अलकनंदा है। ये साड़ी देव नदियां देव प्रयाग में आकर मिलती और ये सप्त धाराएं एक होकर गंगा के रूप में सातों दिन सदा के लिए संसार को सुख शांति प्रदान करने के लिए इस धारा पर बहती आ रही है।

गंगा जी अवतरण की कथा 

आइये अब गंगा के अवतरण की कथा पर एक नजर डालते हैं। यह कथा सतयुग काल की है जब यहाँ एक बड़े ही प्रतापी राजा सगर हुए। राजा सगर के साथ हजार पुत्र थे। उनके सभी पुत्र बड़े ही बलशाली और वीर योद्धा थे। एक बार उन्होंने अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया। राजा के यज्ञ से भयभीत होकर देवराज इंद्र ने यज्ञ का घोडा चुराकर भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले एक महान ऋषि कपिल मुनि के आश्रम में जाकर उस घोडा को बाँध दिया।


गंगा मंदिर 


सुन्दर गंगा माता के किनारे घर 

जब राजा सगर के साठ हजार पुत्र यज्ञ पशु को खोजते खोजते कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे और वहां अस्वमेध का घोडा बंधा पाया तो वे क्रोधोन्मत हो कर मुनि को अश्लील गलियां देने लगे। इससे मुनि का ध्यान भंग हुआ और उसने अपने क्रोधित नजरों से सगर के साठ हजार पुत्रों की ओर दृष्टिपात किया जिससे देखते ही देखते उनके सभी पुत्र जलकर राख हो गए। उसके बाद उनके पौत्र अंशुमान ने जाकर ऋषि से प्रार्थना की और अपने चाचाओं के मुक्ति का उपाय पूछा। अंशुमान के प्रार्थना से प्रशन भगवान कपिल ने उन्हें गंगा के द्वारा मुक्ति का मार्ग बताया। गंगा को स्वर्ग लोक से धरती पर लाने के लिए अंशुमान ने हजारों बर्षों तक तपश्या की लेकिन गंगा को धरती पर लाने में वो असफल रहे।
अंशुमान के बाद उनके पुत्र दिलीप ने कई वर्षों तक कठीन तपश्या की लेकिन स्वर्ग लोक से गंगा को लाने में वो भी सफल नहीं हो सके। उसके बाद उनके पुत्र भागीरथ ने शिव जी की कठिन तपश्या करके गंगा को धरती पर लाने का काम किया। जिससे सगर के पुत्रों का तो उद्धार हुआ ही साथ ही साथ आज सम्पूर्ण जीव -जगत को गंगा जीवन दे रही है। ऐसी पतितपावनी गंगा को कोटि कोटि प्रणाम।

केदारनाथ जी के दर्शन करने के बाद अब हम सब मित्र चले गंगोत्री धाम की तरफ  पांच बजे के करीब हम आगराखाल मे चाय पीने के लिए रूके।आधे घंटे बाद यहां से चल कर चम्बा पार करके स्यालसौड़ मे रूके।अभी सुबह के सात बजे थे और प्रेशर भी जोर मार रहा था।यहीं दो तीन जलपान की दुकानें थी और शौचालय भी बना था।7:30 बजे यहां से फारिग होकर आगे बढ़े।
गंगोत्री रस्ते की फोटो 
10:30 बजे हम उत्तरकाशी पहुंच गये। यहां पहुंच कर मैने अपने मित्र को फोन किया तो पता चला की डोडीताल रास्ते मे कोई भी दुकान या गांव नहीं है और ना ही हमारे पास स्लिपिंग बैग थे।डोडीताल का प्रोग्राम कैंसिल करके आगे बढ गये।उत्तरकाशी से रोड गंगाजी के साथ साथ ही चलती है।करीब 30 km आगे धरासू बैंड पर गाड़ी रोक दी।यहां से यमुनौत्री और गंगोत्री के रास्ते अलग होते हैं।मन मे यमुनौत्री जाने का विचार आया पर मैने सोचा कि जब यमुनौत्री जाना था तो पहले ही देहरादून होकर आ जाते मन की इच्छा का पल भर त्याग हो गया। अब जोर की भूख लग रही थी यहां गरमा गरम परांठे खाये। धरासू बैंड से मनेरी, भटवारी होते हुए आगे बढे।भटवारी से आगे एक रास्ता बरसू होकर दयारा बुग्याल जाता है यहां गंगोत्री की ओर जाने वाली रोड को चौड़ा कर रहे हैं तो यहां रास्ता बंद मिला।


उत्तरकाशी 


जय गंगा माता की 
थोड़ी देर मे रास्ता खुल गया और हम आगे बढ गये कुछ ही दूरी पर गरम पानी का कुंड *गंगनानी* मे है।यहां बस एक दो दुकानें ही खुली थीं बाकी सब बंद पड़ी थीं।यहां से मां गंगा बांयी ओर बहती हैं जो कुछ दूरी पर लोहारी नागपाला मे फिर दांई ओर हो जाती हैं।अब सामने सुखी टॉप की चढाई पर बर्फ के प्रथम दर्शन हुए। बर्फ देखकर बार बार गाड़ी रोकने का मन करा पर मन मारा सब मित्रो ने और गंगोत्री मंदिर पहुचने का निर्णय लिया गया 

ब्राह्मीताल 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।यहां गंगोत्री की तरफ की चोटियां और यमुनोत्री की तरफ काला नाग स्वर्गारोहिणी आदि के शानदार नजारे दिखते हैं।यह जसपुर बैंड (सुखी टॉप से थोड़ा आगे) से 14 km दूर है जिसमें 5 km आगे पुराली गांव पड़ता है।पुराली से ब्राह्मीताल तक कुछ नही मिलता।ब्राह्मीताल मे ही एक बाबाजी का निवास है ऐसा लोकल बंदो से पता लगा।इस ट्रैक को उत्तराखंड सरकार ने "ट्रैक ऑफ द इयर" घोषित किया है पर इसके बारे ज्यादा जानकारी या सुविधायें नहीं दीं। हमारा प्रोग्राम गंगोत्री से लौट कर यमनोत्री जाने का था .

सुखी से आगे झाला पुल पार करके हम हर्षिल घाटी मे प्रवेश कर चुके थे। यहां से धराली,लंका घाटी, भैरों घाटी होते हुए हम मोक्षदायिनी मां गंगा के दरबार मे पहुंच चुके थे।

सुबह के नज़रे पर्वतो के 



मनमोहक दर्शय 



जय गंगा माता की 
जहां पार्किंग मे हमारी गाड़ी खड़ी थी वहीं से सीढीयां उतर कर नीचे सूर्यकुंड है जिसे देखने को मैं बहुत लालायित था।सूर्यकुंड मे मां गंगा गौमुख से और केदार गंगा केदारताल से आकर मिल जाती हैं।सूर्यकुंड से छोटी सी संकरी घाटी पार करके गौरीकुंड है।इससे आगे बढने पर रूद्रगैरा से रूद्रगंगा और नेलांग वैली से नीलगंगा आकर भागीरथी मे मिलती हैं।

यमनोत्री धाम दर्शन 

यमनोत्री धाम का महत्व 

हिन्दु धर्म में कई नदियो जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती आदि कई नदियो को पवित्र व देवी माना जाता है।और इनकी पूजा अर्चना की जाती है। यमुनोत्री धाम यमुना का उदगम स्थल है। यहा पर एक मंदिर में यम जिनके बारे में कहा जाता है कि यह देवी यमुना के भाई थे कि मूर्ति के साथ यमुना देवी की मूर्ति स्थापित है। यमुना सूर्य भगवान की पुत्री है। ये भी गंगा की ही तरह हिमालय से जन्मी है। इसलिए इन्हें भी गंगा की तरह ही बहुत पवित्र माना जाता है। यमुना के स्मरण मात्र से ही पापो का नाश होकर मन पवित्र हो जाता है। यमुनोत्री का स्थान समुंद्र तल से लगभग 10000 हजार फुट की उचांई पर स्थित है। यहा स्थित यमुनोत्री मंदिर का निर्माण टिहरी के महाराजा प्रतापशाह ने करवाया था। यहा मंदिर में यमुना की प्रतिमा है। 

यमनोत्री धाम दर्शन करे आप सब 

यमनोत्री धाम कथा 

कहा जाता है कि महर्षि असित का आश्रम यही था। वे नित्य स्नान करने गंगाजी जाते थे और यही निवास करते थे। वृद्धावस्था में उनके लिए दुर्गम पर्वतीय मार्ग नित्य पार करना कठिन हो गया। तब गंगाजी ने अपना एक छोटा सा झरना ऋषि के आश्रम के पास प्रकट कर दिया। वह उज्जवल जटा का झरना आज भी वहा है। हिमिलय में गंगा और यमुना की धाराएं एक हो गई होती  यदि मध्य में दंड पर्वत न आ जाता। देहरादून के समीप ही दोनो धाराएं बहुत पास आ जाती है।

यमनोत्री जल कुण्ड 

यमनोत्री धाम गर्म जल कुण्ड
यहा यमुनोत्री देवी मंदिर के अलावा कई गर्म पानी के कुंड है। जिनका जल खोलता रहता है। यत्री कपडे में चावल बाधंकर इनमें डुबो देते है और वे पक जाते है। इस प्रकार यहा भोजन बनाने के लिए चूल्हा नही जलाना पडता। इन कुंडो में स्नान करना संभव नही है और यमुना का जल इतना ठंडा है कि उसमे भी स्नान करना मुश्किल होता है। इस लिए यहा गर्म व ठंडे जल को मिलाकर स्नान करने के लिए कई कुंड बने है। बहुत ऊंचाई पर कलिन्दगिरी से हिम पिघलकर कई धाराओ में गिरता है। कलिन्द पर्वत से निकलने के कारण यमुना जी को कालिंदी भी कहा जाता है। यहा ठंड इतना रहता है कि बार बार झरनो का पानी जमता पिघलता है। ऐसे शीत स्थान में गर्म पानी का झरना और कुंड का पानी वो भी उबलता हुआ जिसमें अगर हाथ डाला जाए तो फफोले पड जाएं एक चमत्कार है। यहा के प्रमुख कुंडो में सूर्य कुंड, गौरी कुंड, तथा सप्तश्रषि कुंड प्रमुख है।

यमनोत्री धाम पैदल मार्ग का परिचय 

यमनोत्री धाम पैदल मार्ग यात्रा 

यमनोत्री धाम घोड़ो या खच्चर दुवारा यात्रा 
यमुनोत्री यात्रा का प्रवेशद्वार ऋषिकेश है। यहा से यमुनोत्री मोटर मार्ग की दूरी 227 किलोमीटर है। ऋषिकेश से नरेन्द्रनगर, आगराखाल, चंबा, उत्तरकाशी, धरासु होते हुए फुलचट्टी तक कार द्वारा पहुचां जा सकता है। इससे आगे के यमुनोत्री धाम तक 8 किलोमीटर का पगडंडी रास्ता पैदल तय करना पडता है। वेसै यात्रियो की सुविधा के लिए यहा पालकी और खच्चरो की सुविधा है। जिसमे यात्री।कुछ शुल्क देकर सुविधा का लाभ उठा सकते है

यमनोत्री धाम यात्रा करते हुवे कुछ बाते ध्यान रखे आप 

[1] यदि यमुनोत्री, गंगोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ की पूरी यात्रा करनी हो तो यमुनोत्री से यात्रा प्रारंभ करे।

[2] यदि इनमे से किसी एक दो स्थान पर जाना हो तो यात्रा ऋषिकेश ya हरिद्वार से आरंभ करे

[3] उत्तराखंड की पूरी यात्रा के दौरान रबड के जूते या स्पोर्टस शूज का इस्तेमाल करे जो फिसलने वाले न हो

[4] पैदल यात्रा के दौरान हाथ में छडी या डंडा अवश्यक रखे

[4] यात्रा के दौरान अपने साथ रेन कोट अवश्य रखे। छाते से पैदल मार्ग पर यात्रा के दौरान असुविधा हो सकती है।

 [5] यात्रा के दौरान हल्का समान रखे। तथा पीठ पिछे टांगने वाले पिठठू बैग का ही इस्तेमाल करे

[6] सांस व अस्थमा के मरीज पैदल चढाई न करे। अपने साथ उचीत दवाईया, फर्स्ट एड बॉक्स, पानी की बोतल अपने साथ अवश्य रखे

[7] प्यास लगने पर झरने का पानी सीधे न पीएं। इससे हिल डायरिया होने का भय ररहता है।

[8] मिश्री, किशमिश, इमली व सूखे आलुबुखारे अपने साथ रखे। जी घबराने पर इनका प्रयोग किया जा सकता है।

[9] यहा सर्दी बहुत होती है इसलिए ऊनी व गर्म वस्त्र का प्रयोग करें

यमनोत्री धाम की कुछ सुंदर फोटो आप भी जरुर देखे 

सुंदर पहाड़ बर्फ से ढके हुवे 


यमनोत्री धाम के सुंदर झरने 



कुछ सुन्दर पहाड़ यमनोत्री धाम के बर्फ से ढके 

उत्तराखंड के चारो धाम की जानकारी मेने आप को देने की सिर्फ कोशिस करी है बहुत कुछ और भी है इन चार दाम में मगर समय नहीं है अभी क्यों की पोस्ट बहुत लम्बी हो गयी है . हम सब मित्र कई जगह पर गए थे . पोस्ट और बड़ी हो जाएगी अभी के लिए में अपने आर्टिकल को विराम देता हु . फिर कभी आप को उत्तराखंड के और भी कई पुराणिक मंदिर के बारे में बताऊंगा . जहा जहा हम गए है जेसे पंच बद्री ,टिहरी डेम आदि अभी सिर्फ मेने आप को चार धाम यात्रा के बारे में बताया है. अब चले अपने घर हरिद्वार हम सब जय गंगा माता की .

हरिद्वार हर की पौड़ी
हरिद्वार गंगा माता की आरती आप यहाँ क्लिक कर के देखे और विडियो को शेयर जरुर करे आप का धन्यवाद 

आप लोगो को चार दाम यात्रा के रेट लिस्ट दे रहा हु . जो की हरिद्वार से चार धाम की है . ये जो में आप को रेट लिस्ट दे रहा हु ये समय समय पर बदलती रहती है तो यदि आप लोग भी चार धाम या फिर दो धाम की यात्रा करना चाहते है तो आप मुझ से मेरे मोबाइल नंबर पर फोन कर के जानकारी ले सकते है . आप की हेल्प कर के मुझे बहुत खुशी मिलेगी . धन्यवाद आप सब का आप ने अपना कीमती समय दिया पोस्ट को पड़ने के लिए . फोन नंबर 7017596641 

रेट लिस्ट चार धाम की 

[1] innova car ---- 3500/ PAR DAY CHAR DHAM              7+1 SEATING         TOTAL 9 DAY

[2] swift dzire----- 2500/ DAY DAY CHAR DHAM             4+1 SEATING         TOTAL 9 DAY

[3] tavera car/scorpio ------- 33OO/ PAR DAY DHAM         11+1 SEATING        TOTAL 9 DAY

[4] क्लोजर चार -------- 5000/ PAR DAY CHAR DHAM        10 + 1 SEATING      TOTAL   9 DAY

[5] टेपो ट्रेवल   ---------- 5500/ PAR DAHY CAR DHAM        12+1 SEATING        TOTAL   9 DAY

[6]  टेपो ट्रेवल   ---------- 6500/ PAR DAY CHAR DHAM        14+1 SEATING    TOTAL 9 DAY 


[7] 2*2 बस     ----------- 5200/ par व्यक्ति  चार धाम                                                  TOTAL 10 DAY

[8] 3*2  बस ------------- 4300/PAR व्यक्ति चार धाम                                                   TOTAL 10 DAY

एक धाम यात्रा रेट लिस्ट 

[1] swift dzire----- 9000/  EK DHAM             4+1 SEATING               3DAY 

[2] innova car ---- 12000/ EK DHAM              7+1 SEATING              3 DAY

[3] टेपो ट्रेवल   ---------- 11000/ EK DHAM        12+1 SEATING           3 DAY 

NOT....चारो धाम में से यदि आप को कोई एक धाम करना है तो 3 दिन में एक धाम पूरा हो जाता है किराया करीब करीब एक जेसा है . आप को अपनी मनपसन्द कार कोई भी चाहिए वो भी आप को मिल जाएगी उचित मूल्य पर 

NOT... 2 धाम या 3 धाम का किराया करीब करीब ये ही होता है . और ये रेट लिस्ट फिक्स नहीं होती है कभी ज्यदा कभी कम रेट होता रहता है .. अगर आप को कम रेट पर चार धाम यात्रा करनी है तो आप सितम्बर से ले कर नवम्बर तक बहुत कम रेट में चार धाम यात्रा कर सकते है जहा आप के मई जून जोलाई अगस्त में मान लो चार धाम में पेसे खर्च होते है 2000000 लाख वाही ऑफ सीजन में आप 1 लाख में चार धाम यात्रा कर सकते है . और सडक पर ना जाम मिलेगा और ना ही किसी धाम में भीड़ और खाना और रहने की वयवस्था भी बहुत बढ़िया .

उम्मीद करता हु आज की पोस्ट से आप लोगो को चार धाम यात्रा करने का कुछ अंदाजा मिल गया होगा . अगर पोस्ट आप को काम की लगे तो प्ल्ज़ शेयर और like जरुर करे अपने मित्रो और फेमली मेंबर के साथ धन्यवाद आप का मिलते है अपनी अगली पोस्ट में कुछ नयी जानकारी के साथ .

MY YOUTUBE CHANNEL LINK JOIN FREE CLICK NOW

MY WHATSAPP NUMBER 7017596641....


POST BY HINDI CELL GURU / NITIN DIMRI 
Share To:

Hindi Cell Guru

Post A Comment:

0 comments so far,add yours